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कॉल के दो घंटे बाद भी नहीं आई 108 एंबुलेंस,महिला की मौत

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सरकारी ट्रामा सेंटर पर 2 घंटे तक 108 एंबुलेंस नहीं पहुंचने से महिला की मौत के बाद सरकारी ट्रामा सेंट? - फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। प्रसव के बाद तबियत खराब होने पर महिला उपचार के लिए सरकारी ट्रॉमा सेंटर पहुंची। महिला की हालत गंभीर होने के कारण आगरा रेफर कर दिया। 108 एंबुलेंस को फोन करने के दो घंटे बाद तक नहीं पहुंची। लिहाजा महिला की मौत हो गई। महिला की मौत होने के बाद परिजनों ने हंगामा किया। सूचना मिलते ही प्रभारी सीएमएस ट्रॉमा सेंटर पहुंच गए। महिला के शव को घर भिजवाया है।
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थाना लाइनपार के लेबर कॉलोनी बेस्ट ग्लास कंपाउंड निवासी साधना ने दो दिन पूर्व प्राइवेट नर्सिंग होम में बच्चे को जन्म दिया था। बच्चे के जन्म के बाद परिजन उसे घर ले गए थे। बुधवार को साधना की तबियत खराब हो गई। परिजन उसे उपचार के लिए सरकारी ट्रॉमा सेंटर ले गए। महिला को रेड जोन वार्ड में भर्ती कर लिया गया। गंभीर हालत देखकर डॉक्टर ने उसे आगरा के लिए रेफर कर दिया। महिला गरीब परिवार की होने के कारण परिजनों ने तत्काल 108 एंबुलेंस को कॉल कर दी। काफी देर तक 108 एंबुलेंस नहीं पहुंची।
अस्पताल में मौजूद चिकित्सक एवं फार्मासिस्ट ने भी कई बार 108 एंबुलेंस को कॉल किया। काफी देर तक एंबुलेंस नहीं आई तो उसकी मौत हो गई। मौत होने से परिवार में चीखपुकार मच गई। परिजनों ने गुस्से में आकर सरकारी ट्रॉमा सेंटर पर काफी हंगामा किया। परिजनों का आरोप था कई बार 108 एंबुलेंस को फोन किया। फोन करने के दो घंटे बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। यह घोर लापरवाही है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। हंगामे की सूचना मिलने पर प्रभारी सीएमएस डॉ.आलोक कुमार पहुंच गए। उन्होंने दूसरी एंबुलेंस के माध्यम से महिला के शव को उसके घर भिजवाया। उन्होंने कहा कि पीड़ित महिला को एंबुलेंस मिलने में देरी क्यों हुई इसकी जांच कराके कार्रवाई की जाएगी।
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इसी का लाभ उठाते हैं प्राइवेट एंबुलेंस संचालक
फिरोजाबाद। सरकारी एंबुलेंस समय से न आने का यह पहला मामला नहीं है बल्कि अक्सर एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंचती हैं। सरकारी एंबुलेंस के समय से नहीं पहुंचने का लाभ प्राइवेट एंबुलेंस संचालक उठाते हैं। काफी देर तक 108 एंबुलेंस के न पहुंचने पर प्राइवेट एंबुलेंस संचालक सरकारी ट्रॉमा लेंटर पर हावी रहते हैं। मरीजों को तत्काल उठाकर उन्हें सस्ता इलाज दिलाने के बहाना बनाकर प्राइवेट अस्पताल में भेजने का काम करते हैं। अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी भी प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों की मनमानी पर ध्यान नहीं देते हैं।
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