बीता साल स्वास्थ्य विभाग के लिए काफी हद तक अच्छा रहा है। मरीजों को बेहतर इलाज करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को तमाम तोहफे मिले। साथ ही साथ उनका बजट भी पूरा आता गया। सिर्फ मरीजों एवं तीमारदारों की प्यास बुझाने के लिए ही विभाग के पास बजट नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ही एक ऐसा विभाग है, जहां विकास कार्यों के लिए एडवांस में झोली भरी रही।
स्वास्थ्य विभाग के लिए बीते वर्षों में करोड़ों के प्रस्ताव भेजे गए। साथ ही साथ प्रस्तावों पर शासन की मुहर भी लगती गई। निर्माण कार्य कराने के लिए शासन ने करोड़ों रुपये की धनराशि को जिला स्वास्थ्य विभाग की झोली में डाल दिया है। चाहे बात ट्रामा सेंटर की हो या फिर आईसीयू यूनिट का निर्माण व सेंट्रल ड्रग सेंटर की। इसके अलावा महिला शिशु कल्याण विभाग, महिला अस्पताल की ओपीडी सर्विस के लिए एडवांस में ही बजट मिल चुका है।
बस! प्यास बुझाने को बजट नहीं भेजा
जिला अस्पताल परिसर में मरीजों एवं तीमारदारों की प्यास बुझाने के लिए ट्यूबवेल के लिए प्रस्ताव भेजा था। जो जिला अस्पताल के साथ महिला अस्पताल में भी पानी की सप्लाई करेगा। ट्यूबवेल के लिए शासन ने 34 लाख 17 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। मगर बजट ना मिलने की वजह से निर्माणकारी संस्था जल निगम ने अभी तक कार्य शुरू नहीं किया है।
स्वास्थ्य विभाग को मिला करोड़ाें का बजट
महिला शिशु कल्याण विभाग में 100 बिस्तरों का महिला वार्ड के लिए 19 करोड़ 33 लाख 54 हजार।
ट्रामा सेंटर निर्माण एक करोड़ 50 लाख 71 हजार रुपये स्वीकृत हुआ है।
आईसीयू यूनिट का निर्माण व सेंट्रल ड्रग स्टोर के लिए एक करोड़ 10 लाख 18 हजार, महिला अस्पताल में ओपीडी स्टेशन सर्विस मॉर्डन किचन 95 लाख 76 हजार का बजट मिला है।
स्वीकृत सभी योजनाओं का बजट स्वास्थ्य विभाग को मिल चुका है। काम शुरू होना बाकी है। सिर्फ जिला अस्पताल में ट्यूबवेल का पैसा नहीं आया है। आने पर निर्माणकारी संस्था को सौंप दिया जाएगा।
टीके गुप्ता, जेई, जिला स्वास्थ्य विभाग