सावन के पहले सोमवार को शहर के शिवालय हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजेंगे। प्रमुख शिवालयाें में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। मंदिरों में पूजा से दुग्धाभिषेक और जलाभिषेक किया जाएगा। वहीं शाम को मंदिरों में भव्य बंगले के दर्शन होंगे। रविवार के दिन शिवालयों में तैयारियां चली। मंदिरों को साफ-सफाई के साथ रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। मंदिर के महंत श्रावण मास में आने वाले भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिरों में व्यवस्था दुरुस्त कराने में जुटे नजर आए। शहर के गोपाल आश्रम सहित मोहल्ला दुली, गल्ला मंडी, पेमेश्वर गेट स्थित मंदिरों में शाम तक श्रावण मास की तैयारियां होती रहीं।
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700 वर्ष पुराना है श्री सिद्धेश्वरनाथ मंदिर
मोहल्ला दुली स्थित श्री सिद्धेश्वरनाथ मंदिर 700 वर्ष से भी अधिक पुराना है। मंदिर के महंत राममोहन दीक्षित ने कहा कि यहां भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने वालों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। रामलाल महाराज भी कई वर्षों तक मंदिर की सेवा कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि श्रावण मास में प्रात: महादेव का अभिषेक, महाआरती होगी। शाम को भव्य फूल बंगला के दर्शन होंगे।
भोलेनाथ पूरी करते हैं भक्तों की मनोकामनाएं
पंचमुखी महादेव मंदिर अंग्रेजों के शासनकाल का है। मंदिर कमलकांत बताते हैं कि अंग्रेजों के जमाने में यहां शंकर जी छोटी सी मूर्ति थी। 15 साल पूर्व मंदिर में नई मूर्तियां स्थापित कराईं, जो भक्त चारों सोमवार सच्ची श्रद्धा और लगन से भोलेनाथ को बेलपत्र अर्पित करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर में प्रात: जलाभिषेक, पूजा अर्चना होगी, शाम को भव्य फूल बंगला सजाया जाएगा।
यहां शिवरात्रि को होते हैं नाग-नागिन के दर्शन
गल्ला मंडी स्थित श्री रामश्ेवरनाथ मंदिर प्राचीन मंदिरों में से एक है। आचार्य पं. अनंत अनूप शास्त्री ने बताया कि यह मंदिर 300 साल पुराना है। 41 दिन तक मंदिर में दीपक जलाने वाले की भोलेनाथ सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। भोलेनाथ के दर्शनों को दूरदराज से भक्त आते हैं। वह बताते हैं कि शिवरात्रि के दिन मंदिर के आसपास नाग-नागिन के दर्शन होते हैं। भगवान श्रीराम का राजतिलक होने के कारण मंदिर से काफी श्रद्धालुओं की आस्थाएं जुड़ी हैं।
यहां प्राचीन समय से स्थापित है शिवलिंग
पैमेश्वर नाथ मंदिर में प्राचीन समय से शिवलिंग स्थापित है। मंदिर में सिद्धपीठ भी स्थापित है। मंदिर के आचार्य नरेशचंद्र पाराशर बताते हैं 41 दिन तक भोलेनाथ के दर्शन कर दीपक जलाने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। शादी-विवाह में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं।
महाराज शांतनु के समय का है सांती मंदिर
सांती मंदिर 400 साल पुराना मंदिर है। यह मंदिर महाराज शांतनु के समय स्थापित कराया गया था। सांती मंदिर में श्रावण मास में सैकड़ों भक्त गंगाजल और कांवड़ चढ़ाते हैं। सांती मंदिर से श्रद्धालुओं में भारी आस्था है। सांती मंदिर में कई बार चमत्कार हुए हैं। कई बार पिंडी चोरी करने का प्रयास किए गए लेकिन चोर आजतक चोरी नहीं कर सके।