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जिनालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब

Sun, 27 Sep 2015 11:33 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
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फीरोजाबाद। अनंत चतुर्दशी पर जैन मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भोर से श्रद्धालुओं का जिनालयों में आना शुरू हो गया। प्रमुख मंदिरों में तीर्थंकर वासुपूज्य भगवान का निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। श्रद्धालुओं में मंदिरों में वंदना करने की होड़ मची रही। अधिकांश लोगों ने एकाशन, उपवास रखे। शाम को भी मंदिरों में धार्मिक आयोजन होते रहे। दशलक्षण महापर्व का समापन हुआ।
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दिगंबर जैन चंद्रप्रभु मंदिर में लाडू महोत्सव का आयोजन किया गया। जैन दिगंबर युवा संघर्ष समिति के तत्वावधान में वंदनार्थियों के स्वागत हेतु 24 भगवानों के नाम पर स्वागत द्वार लगवाए और मंदिरों में भजनों की रिकार्डिंग से पूरे नगर को गुंजायमान कर दिया गया। दोपहर में आयोजित धर्मसभा में सरस्वती के पूजन के बाद बालयोगी मुनि अमितसागर महाराज ने ग्रंथराज तत्वार्थ सूत्र के दसों अध्याय के 357 मूल सूत्रों का सरस वाचन किया तथा दसवें अध्याय के साथ प्रथम व द्वितीय अध्याय का विस्तृत विवेचन करते हुए मोक्ष तत्व के बारे में बताते हुये कहा कि इस पंचम काल में मोक्ष भले ही नही मिल सकता लेकिन आत्म कल्याण हेतु भावना भाकर पुर्ण्याजन तो कर ही सकते हैं। संसार सुख की इच्छा से किया गया पूजा पाठ आदि धार्मिक क्रियायें करने से पुण्य नहीं बल्कि पाप मिलता है। अपने अज्ञान को ज्ञान मानने वाला मूर्ख के समान है। जो मौन रहता है और अवसर आने पर बोलता है वह विद्धान व जो हर प्रश्न का जवाब दे दे और ज्ञान का बैलेंस बनाये रखे वही बुद्धिमान है। पंडित शिवचरनलाल शास्त्री ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर अपने कहा कि आत्मा में विचरण करने वाला और कामवासना से मुक्त होने वाला ही ब्रह्मचारी है। कामवासना की चपेट में आने वाला साधना से पतित हो जाता है। इससे राजर्षि विश्वामित्र भी नहीं बच सके थे। काम एक ऐसा पहलवान है जिससे अच्छे से अच्छा पहलवान भी नहीं जीत पाता। उन्होंने कहा कि आत्मा का कल्याण करना है तो कुछ ठोस कार्य करना होगा। इसलिये कषाय कम रखें, बच्चे इसीलिये अधिक प्रसन्न रहते हैं। धर्मसभा में ललतेश जैन, विमल जैन, महावीर मामा, जितेंद्र जैन, सुरेश चंद्र जैन, कुलदीप मित्तल, प्रमोद जैन, ललित रपरिया, विमलेश जैन, दीपक कुमार जैन, प्रमोद राजा, अरुण जैन, वीरेंद्र रेंमजा, डा विमला जैन, राजीव जैन, अजय जैन एडवोकेट, वीरेंद्र भदावर, सुरेश चंद्र जैन आदि रहे।

चंद्रप्रभु मंदिर में जलधाराएं आज
चंद्रप्रभु मंदिर समिति के प्रबंधक कुलदीप मित्तल जैन एडवोकेट नेे कहा कि सोमवार को चार बजे चंद्रप्रभं मंदिर की वार्षिक जलधारायें गेट के ऊपर बनी पांडुकशिला पर होंगी। सुबह सात बजे एक दूसरे से गले मिलकर क्षमावाणी पर्व भी मनाया जाएगा।
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