फिरोजाबाद। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की ड्रेस वितरण में फर्जीवाड़े को रोकने की कवायद फेल दिख रही है। डीबीटी के जरिए 1200 रुपये की धनराशि अभिभावकों के खातों में सरकार ने भेजी थी, वह घर के राशन खर्च हो गई। इसका असर है कि जनपद में 21926 बच्चे बिना ड्रेस के स्कूल आ रहे हैं। सख्ती के बाद भी जनपद में 79.22 फीसदी फोटो अपलोड हो सके हैं। कई शिक्षक तो कार्रवाई से बचने के लिए पुरानी ड्रेस में ही बच्चे का फोटो पोर्टल पर अपलोड कर रहे हैं।शैक्षिक सत्र 2023-24 में जिले के 1570 परिषदीय स्कूलों में पंजीकृत एक लाख 45 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं में से 105497 बच्चों के अभिभावकों के खाते में 12 सौ रुपये डीबीटी के जरिए भेजे गए थे। इस धनराशि से दो जोड़ी ड्रेस, जूते, मौजे, स्वेटर व बैग तथा स्टेशनरी अभिभावकों को खरीद कर बच्चों को देना है। इसके बावजूद शैक्षिक सत्र में गत वर्ष विभिन्न कक्षाओं में विद्यार्थियों में अधिकांश बच्चे या तो बिना स्कूली ड्रेस के स्कूल आ रहे हैं या पुरानी ड्रेस में। अनुदान राशि मिलने के बाद अभिभावकों को अपने पाल्य को ड्रेस समेत अन्य सामग्री क्रय कर स्कूल भेजने के प्रति प्रेरित करने में विभाग लगा हुआ है।
सत्यापन के लिए प्रेरणा पोर्टल पर बच्चों की यूनिफार्म समेत फोटो अपलोड करने का निर्देश प्रधानाध्यापकों को दिया गया है। बावजूद इसके अब तक सिर्फ 83571 बच्चों की ही फोटो पोर्टल पर अपलोड हुई। प्रेरणा पोर्टल से रिपोर्ट मिलने के बाद 21926 बच्चों की फोटो अपलोड न होने से सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में विभाग के सामने यह पता करना चुनौती बना हुआ है कि बच्चों के अभिभावकों ने ड्रेस समेत अन्य सामग्री क्रय की है या नहीं।
लगातार हो रही अपलोडिंगसर्व शिक्षा अभियान के तहत बच्चों को शिक्षित करने के साथ ही ड्रेस समेत अन्य सामग्री क्रय करने के लिए अनुदान राशि दी गई है। शिक्षकों को स्कूल में आयोजित होने वाली शिक्षक-अभिभावक मीटिंग के साथ व्यक्तिगत रूप से उनसे मिलकर धनराशि का उपभोग सिर्फ बच्चों के लिए निर्धारित सामग्री के क्रय पर खर्च करने को कह रहे हैं। प्रधानाध्यापकों को बच्चों की यूनिफार्म समेत फोटो अपलोड करने का निर्देश दिया गया है। आशीष पांडेय, बीएसए
पापा की किस्त कट गई या उधारी पटा दी
स्कूल में बिना ड्रेस आने वाले बच्चों पर शिक्षक जब सख्ती करते हैं। बच्चे सहमे हुए शिक्षकों को बताते हैं कि ड्रेस की जो धनराशि आई थी, वह किस्त में कट गई। कुछ बच्चों ने शिक्षकों को बताया कि परचून की दुकान का उधारी का रुपया था, वो पटा दिया। कुछ शिक्षक भी बच्चाें की मजबूरी को समझते हुए बीते साल की ड्रेस में ही फोटो अपलोड कर दे रहे हैं।