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Firozabad News: कॉन्वेंट में मिला निशुल्क दाखिला, फिर भी कर्जदार बन रहे अभिभावक

Wed, 09 Aug 2023 11:52 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
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फिरोजाबाद। अलाभित व गरीब अभिभावकों का अपने बच्चों को काॅन्वेंट स्कूल में पढ़ाने का सपना तो पूरा हो गया। लेकिन यह पूरा सपना अभिभावकों को कर्जदार बना रहा है। आरटीई योजना के तहत कक्षा एक से आठ तक बच्चों को निशुल्क पढ़ाई के साथ प्रति वर्ष पाठ्य पुस्तक व यूनिफॉर्म क्रय करने के लिए पांच हजार रुपये अनुदान मिलता है। जिले में यह अनुदान राशि 2017 के बाद से नहीं मिली। जिले में नौ हजार से ज्यादा अभिभावकों के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है।निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत बेसिक शिक्षा विभाग आर्थिक रूप से कमजोर व अलाभित परिवार के बच्चों को शिक्षित करने के लिए निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाता है। छह हजार से ज्यादा बच्चे निजी स्कूलों में पहले से पढ़ रहे हैं। इस साल भी तीन हजार से ज्यादा बच्चों को निशुल्क दाखिला शहर के प्राइवेट स्कूलों में लॉटरी सिस्टम से करा दिया गया। जब दाखिला लेने के बाद अभिभावकों को कांवेंट स्कूल की महंगी किताबें, यूनिफाॅर्म, बैग खरीदने पड़े तो उनकी चिंता बढ़ गई। कई अभिभावक अपने बच्चों को किताब, कॉपी, यूनिफाॅर्म आदि दिलाने में कर्जदार बन गए।
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अभिभावकों को निजी स्कूल की महंगी पाठ्य पुस्तक व यूनिफॉर्म स्वयं अपने स्तर से क्रय करना पड़ रहा है। अभिभावक लगातार विभाग से मांग कर रहे हैं तो विभाग शासन से धन की डिमांड करने की बात कहते हुए मौन बना हुआ है। ऐसे में गरीब व अलाभित समूह के बच्चों की पाठ्य पुस्तक व यूनिफॉर्म मद में स्वयं से धनराशि खर्च कर शिक्षित करना चुनौती बना हुआ है।

पांच हजार का कोर्स, दो हजार की यूनिफार्मनिजी कॉन्वेंट स्कूल में स्कूलों से ही किताब, काॅपी, स्कैच, पेंसिल, बैग, पानी बोतल और लंच बॉक्स दिया जाता है। इसकी कीमत पांच हजार रुपये है। जबकि यूनिफार्म, सर्दियों के लिए ब्लेजर, जूते, मौजे, हाउस यूनिफार्म भी दी जाती है। जो दो हजार रुपये की कीमत में मिल रही है। ऊपर से कई स्कूल तो परीक्षा शुल्क भी पहले जमा करा लेते हैं। ऐसे में गरीब अभिभावकों के लिए यह पूर्ति कर पाना मुश्किल हो रहा है।
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भेजी गई है डिमांड
योजना के तहत प्रवेश पाने वाले बच्चों को प्रति वर्ष निर्धारित पांच हजार रुपये की दर से भुगतान करने के लिए धन की डिमांड की गई है। धन मिलते ही अभिभावकों के खाते में अनुदान राशि अंतरित की जाएगी। कोई भी बच्चा योजना से वंचित नहीं होगा। बच्चों को शिक्षित करना तो शिक्षा ग्रहण करने में आने वाली परेशानी दूर करना प्राथमिकता में शामिल है।
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आशीष पांडेय, बीएसए
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