योगीराज भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अधर्म का नाश करने के लिए हुआ था। अधर्मी चाहे कोई भी क्यों न हो, उसका दिल कठोर ही होता है। वह अहंकारी एवं अत्याचारी बन जाता है। इसलिए प्रभु पृथ्वी लोक पर आकर अधर्म एवं अधर्मी दोनों का नाश कर, प्राणियों को सुख-शांति से जीवन जीने के लिए मार्ग प्रशस्त करते हैं। यह बात गांव हुसैनपुर में चल रही भागवत में देवी चित्रलेखा ने प्रवचन करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि कंस का राज्य में अत्याचार एवं अधर्म ही अधर्म था। यही नहीं बहन देवकी एवं उनके पति वासुदेव को भी जेल में डाल दिया था। उन्हें उसने बहुत कष्ट दिए। उसके इस अधर्म को समाप्त करने के लिए प्रभु ने श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया। भागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण के जन्म की लीला का मनोहारी मंचन भी किया गया। चित्रलेखा ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का जीवंत वर्णन करते हुए कहा कि बाल्यकाल में कान्हा ने किस तरह अपनी मां यशोदा व गोपियों को परेशान किया। उन्होंने गोवर्धन पूजा का वर्णन किया। जिसको सुनकर भक्तगण भाव-विभोर हो गए। पूर्व सांसद व भाजपा नेता प्रो. एसपी सिंह बघेल ने आरती उतारकर भागवत कथा का शुभारंभ कराया और भागवत का महत्व बताया। कथा के बाद परीक्षत जानकी उदय प्रताप सिंह ने आरती एवं प्रसाद वितरित किया। कथा के दौरान संदीप सिंह, कल्पना सिंह, लटूरी सिंह, महेशपाल सिंह, तेजपाल सिंह, बच्चू सिंह आदि का विशेष सहयोग रहा।
फोटो-टूंडला के गांव हुसैनपुर में भागवत कथा सुनाते देवी चित्रलेखा व सुनते श्रद्धालुगण-2,3