नोटबंदी के कारण धान की सरकारी खरीद थम गई। शासन ने 16 हजार क्विंटल खरीद का लक्ष्य दिया था, लेकिन अभी तक एक दाना तक नहीं खरीदा जा सका। जिन किसानों ने प्राइवेट दुकानदारों एवं आढ़तियों को धान बेचा था उन्हें अभी तक भुगतान नहीं मिला।
जिले में धान की फसल का उत्पादन जसराना, अरांव क्षेत्र में होता है क्योंकि नहरों का किनारा होने के कारण पानी आसानी से मिलता है। धान की कम पैदावार होने के कारण ही जिले में पांच खरीद केंद्र स्थापित किए गए थे। सरकारी दरें तो 1470 रुपया क्विंटल रखी गई, जबकि खुले बाजार में धान 1600 रुपया से महंगा बिक रहा था। लिहाजा सरकारी केंद्रों पर बिक्री को कोई नहीं पहुंचा। किसान धान की बिक्री कर, उस पैसे का प्रयोग गेहूं की फसल की बुवाई में करते थे। लेकिन नोटबंदी के कारण किसानों को नकदी नहीं मिल सकी। आढ़तियों ने धान बिक्री के बदले कुछ किसानों को चेक दिया तो कुछ ने किसानों को पुरानी करेंसी के नोट दिए। किसान पुराने नोट ले आए और बैंकों में जमा करा दिए। लेकिन बैंकों से निकाल नहीं पा रहे हैं। कई किसान चेक क्लियर कराने को बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं।
किसान बोले धान बिका, हाथ में नहीं आए पैसे
- नगला मिलिक निवासी तहसीलदार सिंह बोले, सरकारी धान खरीद केंद्र की जानकारी नहीं थी। एटा मंडी में धान बिक्री किया था। चेक से भुगतान मिला था, बैंक में जमा नहीं करा पाए।
- खुदादादपुर निवासी यशवंत सिंह बोले, पैसों की जरूरत होने पर धान सस्ता बिक्री कर दिया। पुराने नोट मिले। बैंकों में जमा कराने के बाद अब नोट निकालने में दिक्कत हो रही है।
बाजार में महंगा होने के कारण धान के एक भी दाने की खरीद नहीं हो सकी। सरकारी रेट 1470 रुपया था। आढ़तियों के द्वारा 1600 रुपया खरीदा गया। नोटबंदी के कारण हमारे केंद्रों पर कोई बिक्री करने नहीं आया।
राघवेंद्र सिंह यादव,
डिप्टी आरएमओ फीरोजाबाद।