फोटो 9 दबरई में निर्माणाधीन ग्लास म्यूजियम। स्रोतः पर्यटन विभाग
फिरोजाबाद। चूड़ियों की नगरी अब विश्वस्तरीय सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र बनने की राह पर है। दबरई में निर्माणाधीन देश का पहला भव्य ग्लास म्यूज़ियम लगभग तैयार है। 47 करोड़ रुपये की लागत से 25,700 वर्ग मीटर में फैल रहे इस म्यूजियम का 70 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह का कहना है कि यह स्थल न केवल कांच के इतिहास को समेटे होगा, बल्कि पर्यटकों को आधुनिक तकनीक के जरिए एक अनोखा डिजिटल अनुभव भी प्रदान करेगा।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस म्यूजियम को ब्रज सर्किट (वृंदावन, नीम करौरी, बटेश्वर और रापरी) के साथ एकीकृत किया जा रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों को ब्रज की सांस्कृतिक और धार्मिक झलक के साथ-साथ कांच शिल्प की जीवंत परंपरा देखने को मिलेगी। म्यूजियम की बाहरी दीवारें पूरी तरह कांच की होंगी और एक ग्लास ब्रिज टूरिस्ट इंफॉर्मेशन सेंटर को मुख्य भवन से जोड़ेगा।
एआर-वीआर तकनीक से कांच निर्माण का रोमांच
बच्चों और शोधार्थियों के लिए यहां विशेष एआर-वीआर जोन बनाया जा रहा है। इसके जरिए छात्र वर्चुअली देख सकेंगे कि कैसे आग की भट्टी में कांच पिघलता है और उसे सुंदर आकारों में ढाला जाता है। इसके अलावा यहां लाइव ग्लास ब्लोइंग डेमोंस्ट्रेशन होगा, जहां कारीगर पर्यटकों के सामने कांच की कलाकृतियां तैयार करेंगे। प्राचीन मनकों और इत्र की शीशियों से लेकर आधुनिक झूमरों और डिजाइनर ग्लासवेयर तक की यात्रा डिजिटल स्टोरीटेलिंग के जरिए दिखाई जाएगी।
तीन मंजिला भव्य इमारत और डिजिटल गैलरी
यह आधुनिक तीन मंजिला म्यूजियम एक बड़े सांस्कृतिक परिसर का हिस्सा होगा, जिसमें ऑडिटोरियम और इंटरएक्टिव गैलरी भी शामिल हैं। यहां रोशनी, रंग और कांच के माध्यम से विज्ञान को समझाया जाएगा।