फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ग्लास हैंडीक्राफ्ट का बाजार ठंडा

Sat, 26 Nov 2016 12:22 AM IST
दीपक जैन
विज्ञापन
. हैंडीक्राफ्ट आइटम  - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विज्ञापन
नोटबंदी का एक्सपोर्ट मार्केट पर बड़ा असर पड़ा है। ग्लास हैंडीक्राफ्ट का बाजार ठंडा पड़ गया है। बाहर से मिलने वाले आर्डरों पर ब्रेक लग गया है और विदेशी व्यापारियों ने पुराने आर्डरों को भी होल्ड करा दिया है। यूरोपीय बाजार में एक्सपोर्ट आइटमों की मांग 60 प्रतिशत तक गिर गई है। 
ग्लास हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट आइटमों का बाजार दो हजार करोड़ सालाना का है। अब नोटबंदी के बाद निर्यातक कैश फ्लो न होने के कारण हैंडीक्राफ्ट आइटम तैयार करने वाले हस्त शिल्पियों और मजदूरों को भुगतान नहीं कर पा रहे है। वहीं नकद में खरीदने जाने वाले आइटमों की भी खरीद प्रभावित हो रही है। ऐसे में एक्सपोर्ट किए जाने वाले आइटम तैयार नहीं हो पा रहे हैं। हैंडीक्राफ्ट आइटमों का अमेरिका, इंग्लैंड, ब्राजील, बेल्जियम, हॉलैंड, सूडान आदि तमाम देशों के शहरों में सुहाग नगरी के उत्पादों का निर्यात होता है। नोटबंदी से पहले क्रिसमस के आर्डर यहां के निर्यातक निकाल चुके हैं लेकिन रूटीन के बडे़ आर्डरों के साथ-साथ यूरोपीय देश में मनाए जाने वाले ईस्टर फेस्टिवल की मांग एक्सपोर्ट मार्केट में काफी अधिक रहती थी, जो अब नहीं है। निर्यातकों का कहना है कि करेंसी संकट से देश में मची उथल-पुथल के बीच यूरोपीय देशों के व्यापारी भी ठहर गए हैं। बाजार की हालत देख नए आर्डर नहीं दे रहे हैं। तमाम व्यापारी ऐसे हैं जिन्होंने पहले से दिए गए आर्डरों को होल्ड करा दिया है। इसका प्रमुख कारण यूरोपीय देशों में कांच उद्योग पर संकट की खबर फैल गई है, जिससे उन्हें लग रहा है कि समय पर ऑर्डर पूरा करना मुश्किल है। यूं तो एक्सपोर्ट के काम में लेनदेन ऑनलाइन है लेकिन कच्चा माल, मजदूरी, हैंडक्राफ्टिंग और रूटीन के अन्य कामों के लिए नकद भुगतान करना पड़ता है। नकद भुगतान के लिए कैश फ्लो नहीं हो रहा है। 
विज्ञापन


निर्यातकों की बात 
प्रमुख निर्यातक मुकेश बंसल टोनी का कहना है कि हैंडीक्राफ्ट आइटम बनाने के लिए हस्तशिल्पियों और मजदूरों को देने के लिए कैश नहीं है। बैंक से पैसा नहीं मिल रहा है। कहां से आर्डर पूरे करें? हैंडीक्राफ्ट के कई आइटम ऐसे हैं जो बाहर से नकद मंगाने पड़ते हैं। मुरादाबाद से पीतल और ब्रास के कैप आदि कैश में आते हैं। पुरानी करेंसी कोई ले नहीं रहा और नई करेंसी बैंक से मिल नहीं रही। 

निर्यातक अतुल अग्रवाल का कहना है कि नोटबंदी के कारण एक्सपोर्ट आइटमों की मांग गिर गई है। अभी जो आर्डर मिलते हैं उनकी जनवरी तक सप्लाई देनी होती है लेकिन कैश फ्लो थमने से आर्डर समय से दे पाने की स्थिति नहीं है। अब एक्सपोर्ट के कई आइटमों में हम सिल्वर नाइट्रेट (चांदी) से भुगतान करके लेते हैं लेकिन सराफा बाजार ही बंद है तो चांदी भी नहीं मिल रही है। छोटी-छोटी अड़चनें एक्सपोर्ट में बड़ी परेशानी बन गई हैं। 
विज्ञापन


रुपया मजबूत होने का इंतजार 
यूरोपीय व्यापारियों को रुपया मजबूत होने का इंतजार है। नोटबंदी के चलते रुपये की कीमत अभी गिरी है और डालर की कीमत बढ़ गई है। विदेशों में व्यापारी इंतजार कर रहे हैं कि नोटबंदी की डेडलाइन के बाद रुपया मजबूत हो सकता है। इसके बाद डालर की कीमत गिरने पर माल बुक कराएंगे तो लाभ होगा। 

खास बिंदु 
- ग्लास हैंडीक्राफ्ट का कारोबार दो हजार करोड़ रुपये सालाना का है। 
- पांच सौ करोड़ का कारोबार सीधे फीरोजाबाद से होता है 
- 1500 करोड़ का कारोबार मुरादाबाद, दिल्ली, जोतपुर, जयपुर की मंडियों से होता है 
- जिले में ग्लास हैंडीक्राफ्ट आयटमों के निर्यातकों की संख्या 90 है 

इन आयटमों का होता है निर्यात 
कांच के खिलौने, एंटिक ब्रास आइटम, कैंडल, कांच की मूर्तियां, कैंडल स्टैंड आदि।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें