फिरोजाबाद। लोडिंग वाहनों के चक्का जाम के कारण शहर के कांच उद्यमी व कारोबारी चिंतिंत हैं। उद्यमियाें के अनुसार लोडिंग वाहनों की कामबंद हड़ताल जारी रही तो शहर के कारखानों में कांच भंगार व अन्य केमिकल का टोटा हो जाएगा। इसके चलते कारखानों में उत्पादन प्रक्रिया पर ब्रेक लग सकते हैं। नए ''हिट एंड रन'' कानून के विरोध में ट्रांसपोर्ट कंपनियों व वाहन चालकों ने चक्का जाम कर दिया है। दो दिन से लोडिंग वाहनों के चक्का जाम की सूचना के बाद शहर के कांच उद्यमियों की चिंता बढ़ गईं हैं। इसका प्रमुख कारण शहर के कांच व चूड़ी कारखानों में कच्चा माल के रूप में खपने वाली भंगार एवं अन्य जरूरी केमिकल की आपूर्ति की कमी होना है। उद्यमियों के अनुसार कारखानों में जमा कांच भंगार और अन्य केमिकलों का स्टॉक केवल दो-चार दिन के लिए ही होता है। हड़ताल जारी होने की स्थिति में कांच कारखानों में उत्पादन का पहिया थम जाएगा। इसका सीधा असर के कांच कारखानों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों की आजीविका पर भी पड़ेगा।
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कारखानों में प्रतिदिन होती है इन केमिकल की दरकार
-कांच आयटम बनाने के लिए कारखानों में भंगार के अलावा सोड़ा-एस और सिलिका सेंट की आवश्यकता है। सोड़ा-एस और सिलिका सेंट गुजरात से आता है।
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इन राज्यों से आती है कांच की भंगार
फिरोजाबाद के कांच कारखानेदार कांच की भंगार मध्य प्रदेश, दिल्ली, पच्छिमी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और मुंबई आदि राज्यों से मंगाते हैं। ट्रकों के चक्का जाम के कारण कारखानों में दो दिन से कांच की भंगार का सीमित स्टॉक ही रह गया है।
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सुहागनगरी का कांंच व चूड़ी उद्योग एक नजर में
-कुल चूड़ी कारखानों की संख्या- 100
-कुल कांच बोतल इकाइयां- 20
-कुल माउथ ब्लोइंग इकाइयां- 25
-कांच व चूड़ी इकाइयों में प्रत्यक्ष श्रमिकों की संख्या 1.5 लाख
-कांच व चूड़ी उद्योग से जुड़े असंगठित श्रमिक दो लाख
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स्टॉक जमा होने से भी चिंता बढ़ी
शहर के कांच चूड़ी के अलावा ऑटोमैटिक कांच बोतल प्लांटों में प्रतिदिन लाखों की संख्या मे कांच की बोतल व शीशी का निर्माण होता है। अन्य राज्यों में माल की सप्लाई ठप हो जाने के कारण कारखानों में भारी स्टॉक जमा हो गया है।
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-कांच चूड़ी कारखानों में प्रतिदिन कांच की भंगार व अन्य केमिकल की जरूरत होती है। हड़ताल जल्द खत्म नहीं हुई तो चूड़ी कारखानों में उत्पादन ठप हो जाएगा। बिन्नी मित्तल अध्यक्ष द इंडस्ट्रीरियल कॉपरेटिव सोसायटी
-कच्चे माल की किल्लत हुई तो शहर का कांच उद्योग प्रभावित होगा। सबसे ज्यादा दिक्कत श्रमिक वर्ग को होगी।
हनुमान प्रसाद गर्ग अध्यक्ष द ग्लास सिडिंकेट