नोटबंदी से चूड़ी और कांच उद्योग पूरी तरह से धड़ाम हो गया है। अधिकतर कारखाने बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं। जल्दी ही हालात सामान्य नहीं होने पर उद्यमी शट डाउन लेेन का मूड बना रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो करीब तीन लाख मजदूर सड़क पर आ जाएगा। उनके चूल्हे ठंडे पड़ जाएंगे।
चूड़ी और कांच कारखाने चलाने के लिए बाहर से कच्चा माल नहीं आ रहा है। सोडा गुजरात से आता है और रेता राजस्थान से। कांच की भगार पूरे देश से यहां आती है। कच्चा माल यहां तक आने में सबसे अधिक नोटबंदी आडे़ आ रही है। भाड़ा देने को नई करेंसी नहीं है, और पुरानी करेंसी कोई ले नहीं रहा। केमिकल भी बाहर से नहीं आ पा रहा है। एक बार का भाड़ा लगभग 25 हजार रुपये प्रतिदिन होता है। शहर में कांच और चूड़ी के लगभग 250 कारखाने हैं। इनमें दीपावली के बाद करीब 150 से 160 कारखानों में काम लग गया था, शेष कारखानों में काम लगता तब तक नोटबंदी ने जोरदार झटका दिया। हालात सामान्य न होने पर करीब 30 कारखानों में दीपावली के बाद काम नहीं लग पाया। नोटबंदी के कारण गत दिनों एक दर्जन से अधिक कारखाने बंद हो गए थे। तीन दिन पहले ही इनमें से कुछ कारखानेदारों ने जैसे-तैसे काम लगाया लेकिन कैश फ्लो की परेशानी होने से इन कारखानों को फिर से बंद करने की स्थिति आ गई है। जो कारखाने चल रहे हैं उनमें भी कैश फ्लो की गंभीर समस्या है। हालात इतने गंभीर हैं कि कांच-चूड़ी उद्योग में कभी भी बेमियादी शटडाउन लिया जा सकता है। कारण एक कारखानेदार को काम चलाने के लिए प्रति दिन करीब एक से डेढ़ लाख रुपये कैश चाहिए । यह वह पैसा है जो प्रतिदिन काम करने वाले मजदूरों, भाड़ा और रूटीन के अन्य कामों में खर्च होता है। वर्तमान में एक फैक्टरी संचालक को मुश्किल से दस से बीस हजार रुपये बैंक से मिल पा रहे हैं वह भी काफी परेशानी के बाद। अभी तक तो ठेकेदार अपने पास से किसी तरह कैश पैसा देकर मजदूरों से काम करा रहे थे लेकिन ठेकेदारों की जेब भी अब खाली हो गई है। कारखानों में यदि शट डाउन की स्थिति आती है तो कांच चूड़ी उद्योग से जुड़े लगभग तीन लाख मजदूर सड़क पर आ जाएंगे। कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के साथ-साथ जुड़ाई, छंटाई और पल्लेदारी करने वाले श्रमिक भी शामिल हैं।
करंट खाते से भी नहीं मिल रहा पैसा
उद्योगपतियों को करंट एकाउंट से भी पैसा नहीं मिल रहा है, जबकि करंट एकाउंट से 50 हजार तक की निकासी का आदेश है। उद्यमी संजय जैन घंटू ने बताया कि मंगलवार को तीन घंटे लाइन में लगने के बाद करंट खाते से मात्र छह हजार रुपये ही मिले। बैंककर्मियों ने कह दिया कैश खत्म हो गया। अब तो शटडाउन के अलावा दूसरा रास्ता नहीं।
खातों को सीमा में बांधना उचित नहीं
उद्यमी अभिषेक मित्तल चंचल का कहना है कि बैंकों के माध्यम से उद्योपति जो भी लेनदेन कर रहे हैं वह नंबर एक में है फिर उद्योग से जुड़े खातों को सीमा में बांधना उचित नहीं। कालेधन पर चोट के लिए नोटबंदी अच्छा कदम है लेकिन जिस तरह की व्यवस्था सरकार ने बनाई है उससे कांच उद्योग की कमर टूट गई है।
यह अस्थिरता छह माह में भी दूर नहीं होगी
उद्योगपति अजय सिंघल का कहना है कि हालात काफी गंभीर हैं। अब स्थिति ऐसी बन गई है कि कांच-चूड़ी उद्योग में आई अस्थिरता आने वाले छह माह में भी मुश्किल से दूर हो पाएगा। नोटबंदी से देश का भविष्य अच्छा जरूर है लेकिन वर्तमान में कारोबार पूरी तरह से चौपट हो गया है। इस पर सरकार गंभीरता से ध्यान दे।