राम नवमी पर चौबान मोहल्ला में काव्य संध्या का आयोजन प्रकाशचंद्र चतुर्वेदी बादशाह वकील की अध्यक्षता में किया गया। मशहूर शायरों एवं कविताएं ने रचनाएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम का शुभारंभ डा. रामसनेहीलाल यायावर ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। कवि पद्मेश श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रकाश बंसल ने पढ़ा ‘ए मौत मिली गर राहों में, तो साथ उसी के हो लेंगे’। अनवरी कमाल ने पढ़ा ‘बुझी न पेट की जब आग तो वतन से दूर। चले गए हैं घरों को लगा के ताले लोग।’ अरमान वारसी ने पढ़ा ‘इसे जलील और उसे हकीर बोलने लगे, उरुज क्या मिला कि वे जमीर बोलने लगे।’ प्रमोद दुबे ने कहा ‘पैदल चलते-चलते जिनके उदन खटोले हो गए, ऐसे ही कुछ लोग बहुत बद बोले हो गए।’ हरीश चतुर्वेदी ने पढ़ा कि ‘आदमी मजबूर कितना हो गया ओढ़ कर चादर गमो की सो गया।’ जहीर उद्दीन ने पढ़ा ‘गले लग जाओ दिल को साफ कर के, मिटा दो फासला ये दो कदम का।’ दिनेश दिनकर, चंद्रप्रकश यादव, सुनील सुकुमार, डा. एबी चौबे, नसीम तरकस ने भी रचनाएं सुनाईं। इस दौरान डा. अपूर्व चतुर्वेदी, केके चतुर्वेदी, माधव प्रसाद, मुन्नालाल शास्त्री, विपिन कुमार, बाबू शर्मा, अभिनव चतुर्वेदी, अरविंद चतुर्वेदी आदि उपस्थित रहे।