अवैध सिम कार्ड का कारोबार
गिरोह के सदस्य मजदूरों और अशिक्षित लोगों को रुपयों का लालच देकर उनका आधार कार्ड ले लेते थे और उनसे अंगूठे लगवाकर उनके नाम पर सिम कार्ड एक्टिवेट करते थे। इन सिमों को संबंधित व्यक्ति को देने के बजाय महंगे दामों पर साइबर अपराधियों और रिकवरी एजेंटों को बेच दिया जाता था ताकि अपराध के समय उनकी पहचान छिपी रहे। पुलिस टीम ने भारत सरकार के 'प्रतिबिंब' पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर घेराबंदी कर इस गिरोह की गिरफ्तारी की है।
रजनीश के जरिये महेश ने खड़ा किया ठगी का नेटवर्क
रजनीश गुरुग्राम में नौकरी करने गया था। वहीं उसकी मुलाकात महेश से हुई। महेश के गिरोह से जुड़ने के बाद रजनीश ने ही अन्य युवाओं को इस गिरोह से जोड़ा था। सभी को ठगी की रकम में से बराबरी का हिस्सा मिलता था। बीएससी तक पढ़ाई करने वाले राघव और रजनीश का काम गिरोह के लिए अवैध सिम कार्ड जुटाने का था।
जनता से अपील है कि वे किसी भी अनजान लोन एप को डाउनलोड न करें और अपनी निजी जानकारी साझा करने से बचें। यदि इस प्रकार का कोई गिरोह सक्रिय दिखे तो जनता उसकी शिकायत पुलिस से करें।
-सौरभ दीक्षित, एसएसपी
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