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Firozabad News: फिरंगियों का लालच भी नहीं डिगा सका सन्नू तांगे वाले का ईमान

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फिरोजाबाद। गुलामी के दौर में आजादी पाने का जुनून इस कदर सवार था कि सन्नू तांगे वाले का ईमान भी फिरंगी दस हजार रुपये का लालच देकर नहीं डिगा सके थे। क्योंकि क्रांतिकारी पंडित रामचंद्र पालीवाल आंदोलन के दौरान आने-जाने में उसके ही तांगे का प्रयोग करते थे।
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हालांकि बाद में उन्हें बुलंदशहर जिले से गिरफ्तार कर लिया था। अंग्रेजी सैनिकों ने उन्हें जेल भेजने का काम किया था।
स्वतंत्रता आंदोलन में हर कोई अपने-अपने ढंग से जीजान से जुटा था। उन्हीं में शामिल सन्नू तांगे वाले के त्याग एवं ईमान को भुलाया नहीं जा सकता है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान 1942 की क्रांति के बाद अंग्रेजी हुकूमत, क्रांतिकारी नेता पं.रामचंद्र पालीवाल को गिरफ्तार करने के लिए प्रयास में जुटी हुई थी। जब काफी प्रयास करने के बाद भी रामचंद्र पालीवाल का कोई पता नहीं चल सका तो फिर अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें ¨जिंदा या मुर्दा पकड़वाने वाले व्यक्ति को दस हजार रुपये का इनाम दिए जाने की घोषणा कर दी। पं.रामचंद्र पालीवाल उस वक्त भी फीरोजाबाद में गुपचुप ढंग से आया और यहां से चले जाया करते थे।
फीरोजाबाद में उनके आने पर सन्नू तांगे वाला ही उनके साथ में रहता था। हालात यह थे कि वह रात में आने के बाद वह रात में ही तांगे में बैठकर वापस चले जाते थे। इसकी जानकारी जब अंग्रेजी हुकूमत को लगी तो फिरंगियों के आदेश पर चलने वाली पुलिस सन्नू तांगे वाले के पीछे लग गई। पुलिस ने सन्नू तांगे वाले को काफी डराया धमकाया एवं प्रताड़ित करने का काम किया था।
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पुलिस उनसे पं.रामचंद्र पालीवाल का पता पूछने के लिए प्रयास करने में जुटी रही। जब काफी डराने-धमकाने पर भी सन्नू तांगे वाले ने अपनी जुबान को नहीं खोला तो उसे दस हजार रुपया का इनाम दिए जाने का लालच भी फिरंगियों ने दिया। लेकिन सन्नू के ईमान को दस हजार रुपया का लालच नहीं डिगा सका।
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