फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Firozabad News: पारंपरिक चूड़ी उद्योग के साथ नए स्टार्टअप्स में महिलाओं ने भी गाड़े झंडे

विज्ञापन
विज्ञापन
फिरोजाबाद। अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग क्षेत्र में कांच नगरी के युवा, महिलाएं तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। प्रदेश सरकार की ओर से संचालित सब्सिडी युक्त मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना तथा एक जिला-एक उत्पाद योजना के तहत मिलने वाले 50 लाख रुपये तक के अनुदानित ऋण ने जिले के हुनरमंद युवाओं के सपनों को उड़ान दी है। यही कारण है कि एमएसएमई इकाइयों का दायरा अब केवल बड़े कांच कारखानों तक सीमित न रहकर छोटे-छोटे नए स्टार्टअप्स और मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स के रूप में तेजी से फैल रहा है।
विज्ञापन

इस पूरी मुहिम में सबसे क्रांतिकारी बदलाव यह देखने को मिला है कि नौकरी की तलाश में भटकने वाले उच्च शिक्षित और तकनीकी रूप से दक्ष युवा अब खुद की इकाइयां स्थापित कर दूसरों को रोजगार दे रहे हैं। आत्मनिर्भर बनने की इस दौड़ में जिले की आधी आबादी यानी महिला वर्ग ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी की है।


बीते साल 380 नई इकाइयों ने बढ़ाई रौनक, इस बार 361 का बड़ा लक्ष्य
उद्योग विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बीते वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले में सूक्ष्म इकाइयों के रूप में कांच, चूड़ी डेकोरेशन और अन्य सह-उत्पादों की लगभग 380 नई मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स की स्थापना हुई थी। इस शानदार सफलता के बाद चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने 361 नई इकाइयों को स्थापित कराने का एक बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। विभागीय कार्ययोजना के तहत इस वर्ष एक जिला-एक उत्पाद योजना के तहत 186 युवाओं को भारी सब्सिडी वाले लोन के साथ मुख्यधारा के स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा, जबकि मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत 175 अन्य योग्य आवेदकों को लाभान्वित कर उनकी इकाइयां धरातल पर शुरू कराई जाएंगी।
विज्ञापन



चूड़ी से इतर आईटी, डेयरी और हर्बल प्रोडक्ट्स पर जोर
जिले के युवा अब पारंपरिक कांच उद्योग के इतर बाजार की नई मांग के अनुसार कदम बढ़ा रहे हैं। सदर तहसील क्षेत्र और शहरी इलाकों के युवा जहां मुख्य रूप से कांच व चूड़ी डेकोरेशन की नई विधाओं के अलावा डाई मेकिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स की मैन्यूफैक्चरिंग और कंप्यूटर असेंबलिंग जैसी तकनीकी इकाइयों के लिए लोन ले रहे हैं, वहीं शिकोहाबाद, जसराना और सिरसागंज जैसे ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों के युवाओं का पूरा ध्यान कृषि आधारित उद्योगों पर है। महिला उद्यमियों की बात करें तो वे कांच के अनूठे व फैंसी आभूषण (ज्वेलरी मेकिंग), बुटीक और स्किन केयर से जुड़े हर्बल उत्पादों की मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने में सबसे ज्यादा चाव दिखा रही हैं।




सब्सिडी युक्त योजनाएं शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। वर्तमान में सुखद बदलाव यह है कि अब इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए उच्च शिक्षित, डिग्री धारक और पूरी तरह हुनरमंद युवा आगे आ रहे हैं, जो परंपरागत कांच व चूड़ी उद्योग से हटकर मार्केट की डिमांड के अनुसार नए-नए इनोवेटिव प्रोडक्ट्स की मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स डाल रहे हैं। विभाग लगातार इनकी काउंसलिंग और हैंडहोल्डिंग कर रहा है। सबसे अच्छी बात यह है कि वित्तीय साक्षरता बढ़ने से लोन डिफॉल्टरों का पुराना आंकड़ा काफी नीचे आ गया है।
विज्ञापन

- संध्या यादव, उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग केंद्र
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें