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Firozabad News: एक फेरा-अधूरे वचन, सनातन परंपराओं को पहना दिया लापरवाही का कफन

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फोटो-26 मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में गुलाब की बजाय गेंदा की माला पहने जोड़ों को फूल - फोटो : Samvad
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फिरोजाबाद। सात फेरे, सात वचन और अग्नि को साक्षी मानकर रचाया जाने वाला पवित्र परिणय सूत्र... भारतीय सनातन परंपरा का सबसे अटूट अंग माना जाता है। लेकिन जब सरकारी आयोजनों में जिम्मेदार प्रशासनिक नुमाइंदे ही अपनी सहूलियत और खानापूरी के चक्कर में इन पावन संस्कारों की धज्जियां उड़ाने लगें, तो इसे अव्यवस्था कहें या घोर लापरवाही? ऐसा ही एक शर्मनाक नजारा बृहस्पतिवार को समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह के दौरान तिलक इंटर कॉलेज के मैदान में देखने को मिला, जहां सात वचनों और सात फेरों की परंपरा को ताक पर रखकर महज ''''एक ही फेरे'''' में पूरी शादी का नाटक रच दिया गया।
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समारोह के दौरान जब मंत्रोच्चार के बीच वर-वधू फेरे लेने के लिए आगे बढ़े, तो उन्हें सात फेरे पूरे करने का अवसर भी नहीं दिया गया। एक फेरा पूरा होते ही व्यवस्थापक अधिकारियों के इशारे पर मंच से माइक के जरिए रस्म रोकने का फरमान सुना दिया गया। पवित्र अग्नि के समक्ष सात फेरे और सात वचन पूरे किए बिना ही जोड़ों को विदाई दे दी गई। सनातन संस्कृति और वैदिक रीति-रिवाजों का ऐसा मखौल देखकर वहां मौजूद दूल्हा-दुल्हन और उनके स्वजन सन्न रह गए।

शासनादेश की धज्जियां : गुलाब के बजाय गेंदे की माला और घटिया सामग्री
सरकारी बजट और शासनादेश में स्पष्ट प्रावधान है कि वर-वधू को उच्च कोटि की ताजे गुलाब के फूलों की मालाएं पहनाई जाएंगी तथा निर्धारित मानक के अनुसार (आधा किलो बादाम, 250 ग्राम अखरोट, 250 ग्राम मखाना, 500 ग्राम किशमिश व सूखा नारियल) गुणवत्तापूर्ण ड्राई फ्रूट्स और मिठाइयों की डलिया दी जाएगी। लेकिन जिम्मेदारों ने अधिकारियों की नाक के नीचे गेंदे की सस्ती मालाएं पहनाकर औपचारिकता पूरी कर दी। इतना ही नहीं, जो उपहार सामग्री बांटी गई, वह भी बेहद घटिया और मानकविहीन निकली।
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स्वीकृत मैसेज मिलने के बावजूद जोड़े बैरंग लौटाए
आयोजन में संवेदनहीनता की हद तब पार हो गई जब आजाद नगर निवासी नीशू और कबीरनगर निवासी सनी का परिवार शादी के लिए प्रांगण में पहुंचा। मोबाइल पर विवाह स्वीकृति का आधिकारिक मैसेज होने के बावजूद नगर निगम और विभागीय टीम ने बायोमीट्रिक में तकनीकी खराबी बताकर उन्हें मंडप से बाहर कर दिया। परिजन ने विधायक और महापौर के सामने गुहार लगाई, फिर भी उन्हें बैरंग लौटा दिया गया।

नेताओं की मौजूदगी और अफसरों की लीपापोती
समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि नगर विधायक मनीष असीजा, महापौर कामिनी राठौर और सीडीओ शत्रोहन वैश्य द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया था। जहां एक ओर जनप्रतिनिधि नवदंपतियों को आशीर्वाद देकर सरकारी योजनाओं के गुणगान कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर मैदान में सनातन परंपराओं को लापरवाही का कफन पहनाया जा रहा था।

इनकी सुनिए
जब इस पूरी घोर लापरवाही पर जिला समाज कल्याण अधिकारी राजमती से सवाल किया गया, तो वे कमियों पर पर्दा डालते हुए सब कुछ ''''विधि-विधान और मानक के अनुसार'''' होने की बात कही।
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