टूंडला। ब्रज की सतरंगी होली के बीच नगर के गांव चुल्हावली में बुधवार शाम एक अनूठी परंपरा देखने को मिली। परंपरागत होली में महिलाओं ने पुरुषों पर जमकर पैना बरसाए। इस होली में पुरुष चोट खाने के बावजूद ढोल की थाप पर थिरकते और त्योहार का आनंद लेते नजर आए।
पैनामार होली शाम करीब चार बजे गांव के चौक पर शुरू हुई। होली के गीतों से सराबोर युवा होली के पारंपरिक गीतों पर थिरक रहे थे, तभी हाथों में पैना (लकड़ी की छड़ी में चमड़े की पट्टी बांधकर तैयार हथियार) लिए महिलाओं ने मोर्चा संभाल लिया। तीन दर्जन से अधिक महिलाएं, नई साड़ियों में सज-धज कर, नाचते हुए पुरुषों पर टूट पड़ीं। यह मार केवल नाचने वाले युवाओं तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि वहां मौजूद पुलिसकर्मी और अन्य ग्रामीण भी महिलाओं के निशाने से नहीं बच सके। पुरुषों ने भी इस अनोखी परंपरा का पूरा आनंद लिया और पिटते हुए भी मुस्कुराते रहे।
आयोजकों ने इस दौरान दो श्रेणियों में विजेताओं को सम्मानित भी किया, जिसमें सबसे ज्यादा पैना मारने वाली महिला एवं सबसे ज्यादा मार सहने वाले पुरुष थे। पूर्व प्रधान शंकर सिंह सोलंकी ने बताया कि चुल्हावली में यह आयोजन हर साल बेहद उत्साह के साथ किया जाता है। ग्रामीणों का दावा है कि पूरे उत्तर प्रदेश में शायद यह एकमात्र गांव है, जहां इस तरह की पैना मार होली खेली जाती है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, पूरा गांव इस आयोजन का हिस्सा बना। इस दौरान भंवर सिंह सोलंकी, मनोज सोलंकी, देवेंद्र सोलंकी, देवप्रकाश शर्मा, हेमेंद्र शालू, भूरी सिंह सोलंकी, त्रिलोचन जूरैल, वरुण सोलंकी और जीतू सोलंकी, बंबू सोलंकी, पुनीत दिवाकर, राजेंद्र प्रजापति आदि उपस्थित रहे।
इन्हें किया गया सम्मानित
टूंडला। इस अनोखी होली में पुरुषों को सबसे अधिक पिटने वाले पुरुष रिंकू सोलंकी प्रथम, मोनू शर्मा द्वितीय, नरेंद्र दिवाकर तृतीय स्थान पर रहे। पीटने वाली महिलाओं में रानी प्रथम, सुनीता द्वितीय और मिथलेश तीसरे स्थान पर रहीं। इस दौरान आयोजन मंडल ने 21 महिलाओं को साड़ी व 21 पुरुषों को कपड़े देकर सम्मानित किया गया।