फिरोजाबाद/शिकोहाबाद/टूंडला। फर्रुखाबाद के जूनियर स्कूल गौसपुर में एमडीएम बनाते हुए हुई घटना के बावजूद यहां के कंपोजिट विद्यालयों में अधिकारी सबक लेते नहीं दिख रहे हैं। जिले में सरकारी विद्यालयों में मिड-डे मील पकाए जाने के दौरान आगजनी की घटनाओं से निपटने के सुरक्षा इंतजाम आधे-अधूरे हैं। फिरोजाबाद, शिकोहाबाद और टूंडला के परिषदीय स्कूलों की शनिवार को की गई पड़ताल में चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जहां अग्निशमन यंत्र या तो खाली हैं, या बच्चों की पहुंच से दूर ताले में बंद रखे गए हैं।
प्रमुख मामले :
देवनगर कन्या प्राथमिक विद्यालय, फिरोजाबाद यह विद्यालय हिमांयूपुर में एक ही परिसर में संचालित तीन विद्यालयों में से एक है। यहां जिस कक्षा में बच्चे पढ़ते हैं, उसी में खाना पकाया जाता है और गैस सिलिंडर रखा रहता है। प्रधानाध्यापिका रंजना ने बताया कि उन्होंने विभाग को एनजीओ से भोजन मंगवाने के लिए लिखा है, लेकिन सुनवाई नहीं हुई है।
कंपोजिट विद्यालय गढ़ैया, शिकोहाबाद यहां आग बुझाने के लिए दो सिलिंडर रखे मिले, जिनमें से एक भरा हुआ था और दूसरा खाली था। खाना पकाने के लिए रखे गैस चूल्हे का पाइप लगभग तीन माह पूर्व बदला गया था। प्राथमिक विद्यालय-प्रथम, शिकोहाबाद नगर क्षेत्र एमडीएम का खाना एनजीओ से आता है। पड़ताल के दौरान प्रधानाचार्य समेत स्टाफ बीएलओ ड्यूटी पर था। एक शिक्षक ने बताया कि अग्निशमन यंत्र प्रधानाचार्य के कक्ष में ताले में बंद है।
तीन अग्निशमन यंत्र, दो को रसोईघर में बंद किया
कंपोजिट विद्यालय मदावली, टूंडला यहां तीन अग्निशमन यंत्र हैं, जिनमें से दो को रसोईघर में ताला लगाकर रखा गया है, जबकि नियमानुसार इन्हें प्रधानाध्यापक कक्ष और रसोई के बाहर होना चाहिए। विद्यालय की इंचार्ज आभा तिवारी ने बताया कि एमडीएम बनने के समय यंत्रों को पास रख लिया जाता है और उसके बाद वापस ताले में बंद कर दिया जाता है। यह व्यवस्था आपदा की स्थिति में उपकरणों के उपयोग को असंभव बना सकती है।
पुरानी लापरवाही का नतीजा
टूंडला के रसूलाबाद में 2021 में हुई एक घटना से जिम्मेदारों की लापरवाही साफ झलकती है, जब प्राथमिक विद्यालय में गैस सिलिंडर का पाइप लीक होने से आग लग गई थी। इस घटना में रसोईया सुमरादेवी की उपचार के दौरान मौत हो गई थी, क्योंकि अग्निशमन यंत्र में गैस कम थी और शिक्षकों को उसे चलाने का प्रशिक्षण नहीं था। अधूरे और अनुपलब्ध सुरक्षा इंतजामों को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और अधिकारियों के ध्यान न देने पर किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।