फिरोजाबाद। वैश्विक मंदी के दौर में ईस्टर त्योहार ने स्थानीय कांच हस्तशिल्प उद्योग को बड़ी संजीवनी दी है। ईसाई समाज का प्रमुख पर्व अगले साल मार्च 2027 में मनाया जाएगा, लेकिन यूरोप समेत दुनियाभर के 45 से अधिक देशों के बाजारों में इसकी तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। विदेशी खरीदारों ने नवजीवन और प्रकृति से जुड़ी कांच की आकर्षक कलाकृतियों की भारी मांग भेजी है। इससे शहर की विभिन्न इकाइयों और कारखानों में दिन-रात काम चल रहा है।
ईस्टर के मद्देनजर हस्तशिल्पी कांच के खरगोश, घोड़े, गाय, पेड़-पौधे, फूल-पत्ती, अंडे और फ्लावर पॉट जैसी सुंदर कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं। निर्यातकों का कहना है कि इस बार विदेशी खरीदारों ने समय से दो-तीन महीने पहले ही आर्डर दे दिए हैं जिससे उत्पादन और सप्लाई चेन को व्यवस्थित करने का पर्याप्त समय मिल गया है। यही वजह है कि मंदी के बाद भी कारीगरों के चेहरे पर रौनक लौट आई है।
कांच हस्तशिल्प निर्यातक राजीव दीक्षित और सरवर हुसैन ने बताया कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती के बावजूद वेटिकन सिटी, इंग्लैंड, अर्जेंटीना, ग्रीस, ब्राजील, मेक्सिको, फिलीपींस और रूस के साथ-साथ नाइजीरिया व कांगो जैसे अफ्रीकी देशों से भी भरपूर ऑर्डर मिले हैं। उनके अनुसार, इतने व्यापक स्तर पर पहले कभी इतनी जल्दी मांग नहीं आई थी।
10 करोड़ से अधिक के कारोबार की उम्मीद
कांच निर्यातक राजेंद्र गुप्ता और उवैश मुकर्रम का कहना है कि हालांकि कंटेनर कंपनियों की मनमानी और भाड़े के कारण विदेशी बाजारों में माल पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन समय से पहले आर्डर मिलने के कारण गंतव्य तक डिलीवरी आसान हो जाएगी। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के व्यापारियों के जरिए माल भेजे जाने से भुगतान की चिंता भी कम हुई है। इस सीजन में कांच उद्योग को 10 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार की उम्मीद है।