फिरोजाबाद। जनपद न्यायालय में मंगलवार को अधिवक्ता एवं पुलिस के बीच उस समय हाथापाई की नौबत आ गई जब पुलिस न्यायालय में सरेंडर करने पहुंचे हत्या के आरोपी की घेराबंदी करने को अधिवक्ताओं के चैंबर तक जा पहुंची। अधिवक्ताओं ने पुलिस के इस कदम का विरोध किया तो फिर पुलिस बैकपुट पर आ गई। पुलिस टीम करीब तीन घंटे तक कोर्ट के बाहर डेरा डाले रही। कोर्ट ने आरोपी की सरेंडर अर्जी को स्वीकार करते हुए उसे जेल भेज दिया।
थाना मटसेना के गांव नरगापुर में 16 मई को विवाद मारपीट, पथराव फायरिंग में सुशीला देवी की हत्या कर दी थी। इस मामले में थाना मटसेना में कुलदीप उर्फ दिलीप सहित 11 के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। हत्यारोपी कुलदीप उर्फ दिलीप पुत्र सिपाही राम मंगलवार को न्यायालय में सरेंडर करने को पहुंचा था। कुलदीप उर्फ दिलीप के अधिवक्ता प्रवीन यादव एडवोकेट ने सरेंडर किए जाने की अर्जी डाली थी। सरेंडर किए जाने की अर्जी डालते ही न्यायालय ने उसकी कोरोना की जांच कराने के आदेश दे दिए थे।
कोरोना की जांच करने की भनक लगते ही थाना मटसेना के साथ ही मुख्यालय चौकी का फोर्स सक्रिय हो गया। कोरोना की जांच कराने के बाद आरोपी जैसे ही कलक्ट्रेट प्रांगण स्थित अधिवक्ताओं के चेंबर में पहुंच गया था। पुलिस उसका पीछा करते हुए अधिवक्ताओं के चेंबर तक पहुंचकर गिरफ्तारी का प्रयास किया। पुलिस की इस कार्रवाई की अधिवक्ताओं ने विरोध किया। कई सीनियर अधिवक्ताओं ने जब पुलिस को फटकारा तो पुलिस बैकपुट पर आ गई।
बाद में अधिवक्ता कलक्ट्रेट स्थित चैंबर से उसे अपनी गाड़ी में बैठाकर न्यायालय प्रांगण तक लाए। इधर अधिवक्ताओं ने न्यायालय में उसके सरेंडर किए जाने की दोबारा अर्जी लगाई। मामला बिगड़ते देख कोर्ट ने उसकी अर्जी पर सुनवाई करते हुए उसको हाजिर मानते हुए जेल भेज दिया। थाना प्रभारी मटसेना विनय कुमार मिश्र ने कहा कि हत्यारोपी की गिरफ्तारी को टीम लगी थी। अधिवक्ताओं ने कोई किसी प्रकार की नोकझोंक नहीं हुई है।