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Firozabad News: 42 साल पुरानी खोई दुकानों को तलाश रहा प्रशासन

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फिरोजाबाद। जिले में करीब 42 वर्ष पूर्व अनुसूचित जाति के लोगों को स्वरोजगार देने के लिए बनाई गई 350 सरकारी दुकानें अब लापता हो गई हैं। इनकी खोज अब शुरू की गई है। समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण के आदेश पर तहसील प्रशासन की टीमों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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शासन से मिले निर्देशों के बाद जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने जिले के सभी उपजिलाधिकारियों को पत्र जारी किया है। उन्होंने इन दुकानों की गाटा संख्या (भूमि का आधिकारिक नंबर) सहित पूरा ब्योरा मांगा है। इसके साथ ही मौके पर जाकर इन दुकानों के भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह मामला वर्ष 1982 से 1984 के बीच का है। उस समय समाज कल्याण विभाग के तहत अनुसूचित जाति एवं जनजाति वित्त एवं विकास निगम की ओर से इन 350 दुकानों का निर्माण कराया गया था। इनका मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति के युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना था। हालांकि, आवंटन के बाद विभाग और प्रशासनिक अमला इन दुकानों की सुध लेना पूरी तरह भूल गया।
इस लापरवाही का सबसे बड़ा कारण फिरोजाबाद जिले का भौगोलिक इतिहास रहा है। जिस समय (1982-84) इन दुकानों का निर्माण हुआ था, उस समय जसराना, शिकोहाबाद और सिरसागंज तहसीलें मैनपुरी जिले का हिस्सा थीं। फिरोजाबाद और टूंडला तहसीलें आगरा जिले का हिस्सा थीं। इस वजह से दुकानों का निर्माण और उनके रिकॉर्ड अलग-अलग जिलों के अफसरों के पास थे।
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नए जिले के गठन के बाद की स्थिति
5 फरवरी 1989 को फिरोजाबाद को नए जिले के रूप में मान्यता मिली। तब इन संपत्तियों को यहां स्थानांतरित तो कर दिया गया। लेकिन कागजों का मिलान और उनकी देखरेख अधर में ही लटकी रही। अब समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण द्वारा ब्योरा मांगे जाने के बाद इस पुराने रिकॉर्ड की धूल झानी जा रही है। दुकानों की वर्तमान स्थिति, उन पर किसका कब्जा है और उनकी विधिक स्थिति क्या है, इन सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है।


क्षेत्र/ब्लॉक दुकानों की संख्या
नारखी

70
शिकोहाबाद 70
टूंडला
51
फिरोजाबाद
50
मदनपुर
35
सिरसागंज 34
अरांव

25
एका

08
मक्खनपुर
07
कुल दुकानें
350

बयान:
जिले का गठन होने से पूर्व 1982 से 1984 के मध्य अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम द्वारा इन 350 दुकानों का निर्माण कराया गया था। शासन के निर्देशानुसार अब इनके शत-प्रतिशत भौतिक और कागजी सत्यापन का काम तहसील की टीमों के माध्यम से कराया जा रहा है। विभाग की ओर से उपलब्ध सारा पुराना रिकॉर्ड और जानकारियां जांच टीम को सौंप दी गई हैं।
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- राजमती, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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