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Firozabad News: बैंक प्रबंधन की रिपोर्ट के इंतजार में थमी पुलिस की जांच

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फिरोजाबाद। अरांव थाना क्षेत्र के ग्राम भारौल स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में हुए 5.5 करोड़ रुपये के घोटाले में पुलिस की जांच कछुआ गति का शिकार हो गई है। इसका मुख्य कारण बैंक प्रबंधन द्वारा जांच टीम को जरूरी रिकॉर्ड और रिपोर्ट समय पर उपलब्ध न कराना है।
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पुलिस ने बैंक के अधिकारियों से पूरे मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी बैंक ने यह ब्योरा नहीं दिया है कि कब से कब तक कितना सोना तिजोरी से निकाला गया, किस-किस खाताधारक का जेवर गायब है और वर्तमान में तिजोरी में कुल कितना सोना सुरक्षित रखा हुआ है। इस बहुचर्चित कांड का खुलासा 18 जून को बैंक के अधिकारियों की ओर से दर्ज कराई एफआईआर के बाद हुआ था। पुलिस ने बैंक की तिजोरी में गिरवी रखे सोने के 96 पैकेट गायब करने के मुख्य आरोपी क्रेडिट अधिकारी दिलीप कुमार निवासी इटावा, तत्कालीन शाखा प्रबंधक संदीप यादव और स्टाफ अधिकारी नरेश कुमार समेत अब तक कुल सात आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा है। पूछताछ में सामने आया था कि ऑनलाइन सट्टे की लत के चलते मुख्य आरोपी दिलीप कुमार ने अप्रैल 2025 से ही तिजोरी के डबल लॉक कॉम्बिनेशन नियमों की धज्जियां उड़ाकर करीब 5.50 किलो सोना पार कर दिया था। उसने इस सोने को शिकोहाबाद की कई निजी बैंकों और गोल्ड लोन कंपनियों में गिरवी रखकर करोड़ों का कर्ज उठाया और उसे सट्टे में उड़ा दिया।
विवेचक और तकनीकी टीमों को इस पूरे घोटाले की सटीक कड़ियां जोड़ने के लिए बैंक के आधिकारिक लेजर और ऑडिट रिपोर्ट की सख्त जरूरत है। पुलिस यह जानना चाहती है कि गबन का यह सिलसिला किस तारीख से शुरू हुआ था। इसके साथ ही, पुलिस को मुख्य आरोपी दिलीप के नाम पर मिले 106 बैंक खातों के वास्तविक ट्रांजेक्शन और लेजर हिस्ट्री खंगालने के लिए भी बैंक के मुख्य दफ्तर के तकनीकी सहयोग की दरकार है। मगर बैंक अधिकारियों द्वारा आंतरिक ऑडिट और दस्तावेजों की जांच का हवाला देकर लगातार समय मांगा जा रहा है। सीओ सिरसागंज चंचल त्यागी ने बताया कि बैंक के अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है।
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