फिरोजाबाद। शहर की सात लाख की आबादी के बीच फायर विभाग के पास मात्र चार गाड़ियां है। वहीं, शहर में व्यापारिक क्षेत्र काफी संकरे रास्ते पर बने हैं। इन स्थानों पर फायर विभाग की गाड़ियां पहुंच नहीं पाती हैं। शहर का प्रमुख चूड़ी बाजार गली बौहरान, प्रमुख परचून बाजार बजरिया और बजरिया से गल्ला मंडी जाने वाले रास्ते पर फायर विभाग की दमकलें नहीं जा सकती। इमामबाड़ा में चूड़ी बाजार संकरे रास्ते पर बना है।
बर्तन वाली गली और यहां स्थिति राजेश्वरी मार्केट का भी यही हाल है। दिल्ली के कॉमर्शियल इलाके में रविवार को तड़के हुई आग की बड़ी घटना ने सभी को झकझोर दिया। लोगों के अनुसार संकरे रास्ते पर जिस तरह से यहां बजार बने हैं वह भी चिंता का विषय है।
संकरे रास्ते में बसा शहर का प्रमुख चूड़ी बाजार
शहर के प्रमुख चूड़ी मार्केट गली बोहरान में करीब 700 सौ से अधिक चूड़ी की दुकानें हैं। सौ से अधिक चूड़ी गोदाम है। तीन हजार से अधिक श्रमिक यहां प्रतिदिन काम पर आते हैं। मार्केट की चौड़ाई मात्र डेढ़ मीटर है। तिलक भवन, पीपल वाली गली के साथ अन्य गलियां भी लिंक करती हैं।
इन गलियों में भी चूड़ी की दुकानें और बडे़ गोदाम हैं। चूड़ी मार्केट की यह गली उवर्शी तिराहा, बाजेे वाली गली, मोहल्ला राजपूताना के साथ अन्य मोहल्लों को जोड़ती है। संकरी गली के कारण चार पहिया वाहन अंदर तक नहीं पहुंच पाता। हादसा होने पर फायर विभाग की गाड़ी या तो इमामबाड़ा चौराहे तक ही पहुंच पाती है या फिर अन्य रास्तों से उवर्शी तिराहे तक। मार्केट में किसी भी स्थान पर फायर विभाग के हाइड्रेंट प्वांइट नहीं है और न ही पानी का कोई साधन। ऐसे में हादसा होने पर फायर विभाग के अधिकारियों के भी हाथ पैर फूल जाते हैं।
कॉमर्शियल क्षेत्र इमामबाड़ा तक नहीं पहुंच पाती दमकल
गली इमामबाड़ा में संचालित होने वाला चूड़ी मार्केट भी अग्निशमन विभाग की सुरक्षा की दृष्टि से महफूज नहीं है। इस मार्केट की स्थिति भी गली बोहरान में संचालित होने वाले चूड़ी मार्केट जैसी ही है। यहां पर काफी बड़ी संख्या में चूड़ी के कारोबार से जुड़ी दुकानों के साथ गोदाम भी है। व्यापारियों के ठहरने के लिए मुसाफिर खाना भी है। यहां 30 हजार से अधिक की आबादी निवास करती है। तो तीन से चार हजार श्रमिक प्रतिदिन काम करने के लिए आते है। क्षेत्र में जहां इमामबाड़ा है, तो मोहल्ला शीशग्रान, झमइया टोला के साथ करीब आधा दर्जन से अधिक मोहल्ले भी है।
यहां भी नहीं पहुंच पाती है दमकल
दक्षिण कोतवाली के समीप बजरिया मार्केट की बात की जाए तो फायर विभाग द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए है। बजरिया शहर का सबसे बड़ा परचून बाजार में शामिल है। वर्षों पुरानी सब्जी मंडी है तो सौ से अधिक परचून आदि की दुकानें है। समीप में ही गल्ला मंडी भी है। हजारों की संख्या में लोग आते जाते हैं। तो समीप में ही कोतवाली दक्षिण भी है। लेकिन संकरी गली और अतिक्रमण के चलते यहां दिन के समय यदि कोई हादसा हो जाता तो फायर विभाग की गाड़ी नहीं पहुंच सकती।
जमीन में दब गए हाइड्रेंट प्वांइट
शहर में करीब 32 स्थानों पर हाइड्रेंट प्वांइट थे। जो अब पूरी तरह से जमीन में दब चुके हैं। आग लगने पर फायर विभाग की गाड़ियों को पानी लेने के लिए या तो एसपी सिटी आफिस आना पड़ता है या फिर रहना स्थित फायर स्टेशन। जबकि फायर विभाग द्वारा गलियों से गुजर रही मेन पाइप लाइन, नलकूप और टंकियों में कपलिंग लगवाने के लिए कई बार पत्राचार भी किया है। जिससे संकरी गलियों में हादसा होने पर कम से कम पाइप लाइन से पानी लिया जा सके।
सबसे अधिक दिक्कत संकरी गलियों में आग लगने पर होती है। क्योंकि यहां पर कहीं पर भी हाइड्रेंट प्वांइट नहीं है। कपलिंग लगवाने के लिए कई बार नगर निगम अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। लेकिन कहीं पर भी व्यवस्था नहीं की गई है।
लाखन सिंह - फायर स्टेशन प्रभारी
कई बार हादसे हुए हैं। एक बार गली तिलक भवन में संचालित गोदाम में रात के समय आग लगी थी। पानी के अभाव में आग पर काबू पाने के लिए फायर विभाग की गाड़िया कई घंटे तक जूझती रहीं। पर्याप्त पानी होता तो आग पर जल्द काबू पा लिया जाता।
राकेश कुमार - चूड़ी व्यापारी
मार्केट की किसी भी दुकान या गोदाम में आग लगी तो उस पर जल्द काबू नहीं पाया गया। इसका सबसे बड़ा कारण दमकल का मौके न पहुंचा और पानी की साधन नहीं होना पाया गया है।
वरुण कुमार - चूड़ी व्यापारी