साइबर अपराधी मोनू ने कराई थी नरेश से सिपाहियों की मुलाकात
ट्रांसयमुना थाने में सिपाही मनोज और अंकुर प्रताप सिंह की एक साथ तैनाती थी। बीते वर्ष अपराधी मोनू को इन्होंने जेल भेजने में भूमिका निभाई थी। तभी से मोनू इनके संपर्क में आ गया। मोनू के जेल से छूटकर आने के बाद दोनों सिपाही उसके साथ अय्याशी करते थे। साइबर अपराधी मोनू को जब दुर्दांत नरेश ने दो करोड़ की लूट की योजना में शामिल किया तो मोनू ने ही नरेश के सामने पुलिस के किसी व्यक्ति को भी वारदात में शामिल करने का प्रस्ताव दिया था ताकि लूटकांड के बाद पुलिस की प्रत्येक गतिविधि की जानकारी मिल सके और गैंग उसी अनुसार खुद को सुरक्षित कर सके। इसी क्रम में डेढ़ माह पहले नरेश ने सिपाही अंकुर और मनोज से आगरा में उनके किराए के कमरे पर ही मुलाकात की थी।
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मोनू के बयानों पर नहीं हुआ भरोसा
मोनू के द्वारा जब पुलिस को बताया गया कि इस वारदात में उनके साथ आगरा के दो सिपाही भी शामिल हैं, तो पुलिस को उसकी बात पर सहज ही भरोसा नहीं हुआ। पुलिस ने इसीलिए इनके नामों को भी उजागर नहीं किया था। एसएसपी के निर्देश पर पुलिस की एक टीम अपराधियों के मोबाइल नंबरों की सीडीआर, लोकेशन लेने के साथ ही सिपाही मनोज और अंकुर के मोबाइल नंबरों की सीडीआर भी खंगालने लगी। इससे पुख्ता हुआ कि मोनू, नरेश की बातचीत सिपाहियों से होती थी। वारदात वाले दिन और उसके बाद भी इनकी आपस में बातचीत के सुराग मिले। इसके अलावा 30 सितंबर को इनकी मोबाइल लोकेशन नई दिल्ली भी पाई गई। वहीं, सीसीटीवी फुटेज, किराए का जहां कमरा है, वहां आसपास रहने वाले लोगों से जानकारी व इनके सहकर्मियों से जानकारी के आधार पर पुलिस ने पूरी जानकारी जुटाई। जब पुलिस के सामने सटीक साक्ष्य आ गए तो एसएसपी ने अंकुर प्रताप सिंह को दबोच लिया।
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