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UP: यूपी पुलिस के दो सिपाही कैसे बन बैठे अपराधी, दो करोड़ की कराई लूट...पिता की शहादत के बाद पहनी थी वर्दी

Wed, 08 Oct 2025 01:36 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद

सार

यूपी पुलिस में तैनात रहे जिन पिता की शहादत के बाद उनके स्थान पर नौकरी पाई, वो बेटा अपराधी बन गया। वर्दी पहनकर दो करोड़ की लूट में शामिल यूपी पुलिस के दोनों सिपाहियों के लेकर नई जानकारी मिली है। 
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यूपी पुलिस के सिपाही - फोटो : संवाद
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विस्तार
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दो करोड़ रुपये की लूट के मामले में लगातार चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। दोनों आरोपी सिपाहियों के पिता भी पुलिसकर्मी थे। अंकुर प्रताप सिंह मूलरूप से अलीगढ़ के हरदुआगंज थाना क्षेत्र के खैर आलमपुर का रहने वाला था। उसके पिता गिरीश पाल सिंह आगरा में एसओजी में तैनात थे। वर्ष 2000 के करीब बदमाश गिरोह से हुई मुठभेड़ में वह शहीद हो गए थे। उस वक्त अंकुर नाबालिग था। वर्ष 2011 में उसे पिता की शहादत के बदले पुलिस महकमे में मृतक आश्रित कोटे से सिपाही के पद पर नौकरी मिली थी। गिरीश पाल सिंह का नाम आज भी आगरा पुलिस के रिकॉर्ड में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
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उन्होंने दुर्दांत अपराधी जानकी का एनकाउंटर करने वाली टीम में सक्रिय भूमिका निभाई थी। पिता ने जहां, अपराध के खात्मे के लिए अपनी जान दे दी, वहीं बेटे अंकुर ने अपराधियों से हाथ मिलाकर खाकी पर ही कलंक लगा दिया। वहीं, फरार सिपाही मनोज के पिता भी पुलिस में थे। वह मूलरूप से औरैया के बताए जाते हैं। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मनोज के पिता की तैनाती जब फिरोजाबाद में हुई तो उन्होंने उसी समय यहां मक्खनपुर क्षेत्र में मकान बनवा लिया था। तब से उनका परिवार यहीं रहता है।

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साइबर अपराधी मोनू ने कराई थी नरेश से सिपाहियों की मुलाकात
ट्रांसयमुना थाने में सिपाही मनोज और अंकुर प्रताप सिंह की एक साथ तैनाती थी। बीते वर्ष अपराधी मोनू को इन्होंने जेल भेजने में भूमिका निभाई थी। तभी से मोनू इनके संपर्क में आ गया। मोनू के जेल से छूटकर आने के बाद दोनों सिपाही उसके साथ अय्याशी करते थे। साइबर अपराधी मोनू को जब दुर्दांत नरेश ने दो करोड़ की लूट की योजना में शामिल किया तो मोनू ने ही नरेश के सामने पुलिस के किसी व्यक्ति को भी वारदात में शामिल करने का प्रस्ताव दिया था ताकि लूटकांड के बाद पुलिस की प्रत्येक गतिविधि की जानकारी मिल सके और गैंग उसी अनुसार खुद को सुरक्षित कर सके। इसी क्रम में डेढ़ माह पहले नरेश ने सिपाही अंकुर और मनोज से आगरा में उनके किराए के कमरे पर ही मुलाकात की थी।

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मोनू के बयानों पर नहीं हुआ भरोसा
मोनू के द्वारा जब पुलिस को बताया गया कि इस वारदात में उनके साथ आगरा के दो सिपाही भी शामिल हैं, तो पुलिस को उसकी बात पर सहज ही भरोसा नहीं हुआ। पुलिस ने इसीलिए इनके नामों को भी उजागर नहीं किया था। एसएसपी के निर्देश पर पुलिस की एक टीम अपराधियों के मोबाइल नंबरों की सीडीआर, लोकेशन लेने के साथ ही सिपाही मनोज और अंकुर के मोबाइल नंबरों की सीडीआर भी खंगालने लगी। इससे पुख्ता हुआ कि मोनू, नरेश की बातचीत सिपाहियों से होती थी। वारदात वाले दिन और उसके बाद भी इनकी आपस में बातचीत के सुराग मिले। इसके अलावा 30 सितंबर को इनकी मोबाइल लोकेशन नई दिल्ली भी पाई गई। वहीं, सीसीटीवी फुटेज, किराए का जहां कमरा है, वहां आसपास रहने वाले लोगों से जानकारी व इनके सहकर्मियों से जानकारी के आधार पर पुलिस ने पूरी जानकारी जुटाई। जब पुलिस के सामने सटीक साक्ष्य आ गए तो एसएसपी ने अंकुर प्रताप सिंह को दबोच लिया।

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गिरफ्तारी की भनक लगते ही फरार हो गया था मनोज
अपनी गिरफ्तारी की भनक लगते ही सिपाही मनोज फरार हो गया। मंगलवार दोपहर बाद तक पुलिस की कई टीम उसकी तलाश में जुटी रहीं। उसके घर, रिश्तेदारों के यहां भी पता किया मगर कोई सुराग नहीं मिला। देर शाम एक चर्चा उठी कि सिपाही मनोज ने सरेंडर कर दिया है। देर रात को मनोज कुमार ने शिकोहाबाद थाने में सरेंडर किया और अपराधियों से ली गई पांच लाख रुपये की रकम भी पुलिस को सौंप दी।


 
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पुलिस ने मनोज से शुरू की पूछताछ, आज भेजा जाएगा जेल
मनोज के सरेंडर करने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस उससे जानने में जुटी है कि कहीं कोई और भी तो इस वारदात में उनके साथ नहीं शामिल है। मनोज से हुई पूछताछ के संबंध में देर रात तक पुलिस ने कुछ भी उजागर नहीं किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मनोज को आज कोर्ट में पेश कर जेल भेजा जाएगा।
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