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अलाव पड़ जाते हैं ठंडे, रैन बसेरों में घुसने की मनाही

Sat, 23 Jan 2016 07:47 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
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शुक्रवार की रात सर्द हवाएं शरीर से टकराकर हाड़ कंपा रही थीं। गरम वस्त्रों में खुद को ढंकने, रजाई के ओढ़ने के बाद भी दांत बज रहे थे लेकिन ऐसी सर्द रात में गरीब-बेसहारा लोग खुद कहीं एक कंबल तो कहीं बिना कंबल के ठिठुर रहे थे। अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार रात निगम की व्यवस्थाओं का हाल जाना तो कई स्थानों पर अलाव ठंडे पड़े चुके थे तो रैन बसेरा में गरीबों को प्रवेश नहीं मिला। कई स्थानों पर लकड़ियों के खत्म होने पर लोग गरमाहट पाने को कूड़ा करकट जलाते दिखे।
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गांधीपार्क चौराहा
रात करीब 11.20 दुकानों के बरामदे में एक गौवंश (सांड़) सर्दी से ठिठुर रहा था। उसके करीब एक युवक सो रहा था। दो रिक्शा चालक भी बरामदे में कंबल में बदन को ढंके कंपकंपाते मिले। कैमरे का फ्लैश चमका तो बोले क्या बात है साहब। पूछने पर कहा कि रैन बसेरे में घुसने नहीं दिया। इसलिए यहां आ गए।

रेलवे स्टेशन का प्रांगण
रात करीब 11.30 बजे थे। निगम की ओर से डाली गई लकड़ी काफी गीली थी। नगला विश्नू निवासी आटो चालक कमल सिंह, रिक्शा चालक शिवशंकर भारद्वाज अलाव को जलाने का प्रयास कर रहे थे। बोले लकड़ी गीली होने के कारण अलाव जल नहीं पाता। रैन बसेरा में मात्र तीन लोग सो रहे थे। संचालक रिंकू ने बताया कि सिर्फ आईडी लाने वालों को ही सुलाते हैं। अन्य को नहीं। कई गरीब लोग बाहर सोते दिखाई दिए।
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एसएन रोड
समय रात्रि 11.45 बजे। एक कारखाने के बाहर के बरामदे में करीब आधा दर्जन श्रमिक कंबल और चादर ओढ़कर रात गुजारने को विवश थे। न तो अलाव था और न कोई रैन बसेरा। फर्रुखाबाद से पल्लेदारी करने आए बुजुर्ग सुरेश ने कहा कि आईडी प्रूफ नहीं है इस कारण रैन बसेरे में नहीं घुसने दिया। मैनपुरी के सुधीर भी ठिठुरते दिखे।

टेलीफोन एक्सचेंज
समय-रात्रि 11.50 बजे अलाव की आंच लकड़ी कम होने के कारण ठंडी हो चली थी। रिक्शा चालक राहुल, रवि नागर शरीर को गरमाहट देने के लिए कूड़ा करकट को जलाने को विवश थे।

घंटाघर चौराहा
समय रात्रि-11.55 बजे पर चौराहे पर अलाव की  लकड़ी खत्म हो चुकी थी। मंदबुद्धि एक अधेड़ अलाव की राख के सहारे बैठा ठिठुर रहा था।

राजराजेश्वरी कैला देवी भवन
रात 12.00 बजे कैला देवी भवन के बाहर अलाव जल रहा था। बाबा महापूरन दास व फैजाबाद से आकर यहां रहने वाले राजेश अलाव ताप रहे थे। एटा जिले की पटियाली के रहने वाली महिला रामवती खुले आसमान के नीचे सो रही थी। कई प्रसाद की मेजों के नीचे दुबके थे। कुछ लोग बोले यहां रैन बसेरे की सबसे अधिक जरूरत है लेकिन अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया।

कोटला चुंगी चौराहा
रात 12.18 बजे चौराहे पर अलाव नहीं जल रहा था। निकट ट्रांसपोर्ट के ही जल रहे अलाव पर चेतक पर तैनात दो पुलिस कर्मी हाथ सेंकते दिखाई दिए। ट्रांसपोर्ट कर्मी आनंद कुमार के साथ अन्य स्टाफ मौजूद थे। उन्होंने कहा नगर निगम के कर्मचारी जितनी लकड़ी देते हैं वह नाकाफी है।

रोडवेज बस स्टैंड
रात 12.45 बजे स्टैंड पर जल रहे अलाव के पास सोनू व धर्मेंद्र सो रहे थे। आटो चालक भरथना निवासी मुश्तकीम गहरी नींद में था। जब उनसे पूछा कि रैन बसेरे में क्यों नहीं सोए तो बोले आईडी नहीं थी। जबकि कई लोग बगैर कंबल और रजाई के ठिठुर रहे थे।
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यहां भी जलवाएं जाएं अलाव
- जाटवपुरी चौराहा, मोहल्ला कोटला तिराहा, नगला भाऊ चौराहा, बंबा चौराहा आदि ऐसे स्थान हैं जहां श्रमिकों के साथ ग्रामीणों का आना होता है।

यहां बनें रैन बसेरे
- रामलीला प्रांगण स्थित कैलादेवी भवन के सामने।
- शहर के प्रमुख आसफाबाद व ककरऊ चौराहा।
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