- आदित्य को श्रद्धाजंलि देने के लिए एकजुट हुई सुहागनगरी
- हत्यारों को फांसी दिलाने के लिए जनता ने उठाई आवाज
उद्योगपति के पुत्र आदित्य मित्तल की मौत के बाद सुहागनगरी का माहौल मंगलवार की सायं फिर भावुक दिखा। आदित्य को श्रद्धाजंलि देने के लिए उद्यमी, युवा, सामाजिक संगठन, राजनीतिक दलों के लोग सायं साढे़ छह बजे घंटाघर पर एकजुट हुए। कैंडल मार्च के लिए पौने सात बजे कैंडल जलाने का क्रम शुरू हुआ तो ठीक सात बजे लगा कि आसमान भी रो रहा है। चंद बूंदों के बाद बारिश थमी तो शहर की जनता ने सुभाष तिराहे तक शंातिपूर्वक कैंडल मार्च निकाला।
कैंडल मार्च में दलगत राजनीति से उठकर हर कोई आदित्य के पक्ष में न्याय मांग रहा था। एक हाथ में कैंडल दूसरे हाथ में स्लोगन लिखित पट्टिकाएं या बैनर थामकर लोग आगे बढ़ते गए। ‘आदित्य के लिए न्याय चाहिए’, दोस्ती के दगाबाजों को फांसी दो, आदित्य के हत्यारों को फांसी दो। ‘आदित्य हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं’! हम आदित्य हम तुम्हें भुला न पाएंगे.., शहर की जनता आदित्य के परिवार के साथ है ... आदि नारों से लिखीं तख्तियां दिखीं। महिलाओं की संख्या ज्यादा थी तो आदित्य से अंजान युवा भी जुलूस में आदित्य के लिए न्याय मांगते दिखे।
कैंडल मार्च शास्त्री मार्केट, सेंट्रल चौराहा, छिंगामल का बाग होते हुए सुभाष तिराहे पर पहुंचा, जहां लोगों ने एकत्रित होकर दो मिनट का मौत रखा और आदित्य को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कैंडल मार्च में भारत विकास परिषद से संजीव जैन, मयंक जैन, भाजपा महानगर अध्यक्ष कन्हैयालाल गुप्ता, अभिषेक मित्तल चंचल, सपा नेता राजनरायन मुन्ना, माथुर वैश्य महासभा के पूर्व मंडलाध्यक्ष ध्रुव कुमार आचार्य, सुभाषचंद्र गांधी, अशोक गुप्ता, पवन मुरवारिया, मीरा सिंह, पलक वार्ष्णेय, आलिंद अग्रवाल, नितिन वर्मा, अचल मित्तल, जायंट्स ग्रुप महिला शक्ति से आरती शर्मा, अनु बंसल, रेनू अरोरा, कल्पना राजौरिया, रेखा गुप्ता, अमित बंसल आदि सैकड़ों लोग शामिल हुए।
फरार आरोपियों को क्यों नहीं पकड़ रही पुलिस
कैंडल मार्च से पूर्व लोग एकत्रित थे। बातचीत में अधिकांश का कहना था कि जो लोग नामजद किए हैं, आखिर पुलिस उन्हें क्यों नहीं पकड़ रही है। पुलिस चाहे तो हत्यारों को तुरंत गिरफ्तार कर सकती है। सुभाष तिराहे पर कैंडल मार्च का जब समापन हो गया तब सपा नेता राज नरायन गुप्ता मुन्ना सहित कई लोगों ने एसपी सिटी से कहा कि मुकदमे में जो लोग नामजद हैं उन्हें पुलिस गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही है? जांच के नाम पर हो क्या रहा है? एक पुलिसकर्मी भी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी को नहीं भेजा गया है।
क्या कहते हैं युवा
- निवेदिता ने कहा कि इस घटना से बहुत आहत हैं। अब दोस्ती पर कोई विश्वास नहीं करेगा। धोखा देने वालों को फांसी दो।
- प्रियंका ने कहा कि हम आदित्य के लिए न्याय मांगने आए हैं। आदित्य के हत्यारे जो फरार हैं, उन्हें फांसी मिलनी चाहिए।
- अंकुर ने कहा कि जो पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, उन्हें पुलिस जल्द गिरफ्तार करे। एक धोखेबाज दोस्तों को सामाज से बाहर किया जाना चाहिए।
बेहद सरल स्वभाव का था आदित्य
कैंडल मार्च के दौरान आदित्य से नजदीकी रखने वाले कई लोग शामिल थे। आपस में इन लोगों की चर्चा में आदित्य का स्वभाव ही शामिल था। लोगों का कहना था कि आदित्य काफी सरल स्वभाव का और शर्मिला था। पढ़ाई के बाद उसने पिता के साथ कारोबार में हाथ बंटाना शुरू किया था। वह फैक्टरी भी जाने लगा था। उसके व्यवहार और मृदुभाषा से कारखाने में काम करके वाले श्रमिक उसके कायल हो गए थे। फैक्टरी में एक दिन तो ऐसा नाजारा था कि एक कर्मचारी के आवास की बिजली खराब होने पर वह स्वयं खड़े होकर उसे ठीक करा रहे थे। जबकि वह फैक्ट्री में डायरेक्टर के पद पर थे। इस पर उनके परिवारीजनों ने टोका भी था कि पद के डेकोरम ध्यान रखना चाहिए।
मुकदमे के वादी पम्मी मित्तल को मिली सुरक्षा
एसएसपी अशोक कुमार सोमवार की दोपहर को आदित्य के सर्कुलर रोड स्थित आवास पर गए थे। इस दौरान यहां कुछ लोगों ने परिवार की सुरक्षा की मांग की थी। मुकदमे के वादी आदित्य के ताऊ प्रदीप मित्तल पम्पी को सुरक्षा देने की मांग की गई थी। एसएसपी ने उनकी सुरक्षा के लिए गनर मुहैया कराया है।