फिरोजाबाद। करीब एक सप्ताह पहले भंगार के दाम बढ़ जाने से कांच बोतल व शीशी की लागत में इजाफा हो गया है। वहीं घरेलू बाजारों में भी आर्डरों का टोटा है। इसके कारण फिरोजाबाद के कांच बोतल कारोबार की रफ्तार थम गई है। लागत बढ़ जाने एवं ऑर्डर नहीं होने के कारण करीब 15 कारखानों में कांच बोतल, परफ्यूम व दवा पैकिंग वाली शीशी का उत्पादन कम करने के लिए कई मशीनें बंद कर दी गई हैं। एक ओर जहां शहर का परंपरागत कांच चूड़ी उद्योग कैरोसिन की किल्लत के कारण बंदी की मार से जूझ रहा है। वहीं दूसरी और माउथ ब्लोइंग कारखानों में भी पर्याप्त ऑर्डर नहीं होने के कारण कामकाज प्रभावित है। शहर के कांच उद्योग जगत पर अब एक और तीसरी मुसीबत खड़ी हो गई है। शहर की ऑटोमैटिक कांच बोतल कारखानों में भी उत्पादन की रफ्तार थमने लगी है। इसका प्रमुख कारण देश के विभिन्न हिस्सों खास तौर पर राजस्थान से आने वाली भंगार (ब्रोकन ग्लास) की कीमतों में एक सप्ताह के भीतर तीन से चार रुपये तक की बढ़ोतरी हो गई है। इससे कांच बोतल व शीशी की लागत में भी ईजाफा हो गया है। कारखानेेदारों की माने तो देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाली भंगार के भाव एक सप्ताह पहले करीब नौ रुपये प्रति किलोग्राम थे, लेकिन वहीं भंगार अब दस रुपये 80 पैसे प्रति किलोग्राम की भाव में भी उपलब्ध नहीं है। मय भाड़ा व बिल्टी चार्ज देने के बाद भंगार का असल मूल्य प्रति किलोग्राम लगभग 12 रुपये तक पहुंच गया है।
शराब-बीयर व दवा कंपनियों से नहीं मिल रहे ऑर्डर
कारखानेदारों ने बताया कि गर्मी की शुरू होते ही शराब व बीयर निर्माता कंपनी हरी और गहरे मटमैला रंग की बोतल की डिमांड करती थीं। वहीं तरल दवा बनाने वाली कंपनियों में भी 10 मिलीग्राम से लेकर 100 ग्राम मापन वाली शीशी की डिमांड अच्छी खासी डिमांड निकलती थी। इस बार भंगार के दाम लगातार बढ़ जाने के कारण कंपनियां कांच बोतल और शीशी की दरों में संशोधन को तैयार नहीं हैं। इसका फायदा विदेशी कांच कारोबारी उठा रहे हैं।
यहां होता है कांच बोतल व शीशी का निर्माण
आईबी ग्लास, सीताराम ग्लास, कॉरोगेशन ग्लास, आदर्श कांच इंडस्ट्रीज, मित्तल सिरेमिक, जगदंबा ग्लास, पायोनियर ग्लास, क्राउन ग्लास, विजेता ग्लास, ओम ग्लास आदि।
ब्रोकन ग्लास व अन्य केमिकल के भाव बढ़ गये हैं। इसका असर कांच बोतल व शीशी निर्माण की लागत पर पड़ा है। घरेलू और विदेशी बाजारों में पहले से ही कड़ी प्रतिस्पर्धा है। ऑर्डर नहीं होने के कारण कई कांच कारखानों में मशीनें बंद करनी पड़ी हैं।
-श्रेय बंसल कांच बोतल कारखानेदार
देश व प्रदेश की बीयर, शराब, दवा और शीतल पेय बनाने वाली कंपनियों का रूख प्लास्टिक और गत्ता पैकिंग की ओर ज्यादा है। पिछले साल तक हालात सामान्य थे, लेकिन इस बार कांच बोतल व शीशी के ऑर्डर बेहद सीमित हैं। इसका व्यापक असर उत्पादन पर पड़ रहा है।
प्रदीप पचौरी, कांच आयटम के प्रमुख सप्लायर व उद्यमी