फिरोजाबाद। कोरोना काल में लोग आर्थिक रुप से परेशान हैं। इस बीच महंगी बिजली का भी झटका लगने वाला है। पहले कहा जा रहा था कि बिजली की दरें इस समय नहीं बढ़ाई जाएंगी। तब जाकर लोग राहत महसूस करने लगे थे। किंतु अब यूपीपीसीएल ने घाटा होता देख उपभोक्ताओं पर भार बढ़ाने की तैयारी कर ली है। बिजली कंपनियों ने जो नए स्लैब की दरें तय की हैं, उससे कम खपत वाले 80 फीसदी घरेलू उपभोक्ताओं का बिजली खर्च बढ़ने वाला है। लोगों का कहना है कि पहले ही बिजली काफी महंगी है अब और रेट न बढ़ाए जाएं।
- वैसे ही महंगाई का भार मध्यम वर्ग पर है। सरकार बिजली की दर बढ़ाकर कमर तोड़ रही है। देश के किसी भी राज्य में बिजली इतनी महंगी नहीं हैं। ईमानदारी से बिल भरने वाले उपभोक्ता पर ही दबाव बनाकर घाटा पूरा किया जाता है। जबकि अधिकारियों की ही नाकामी है कि बिजली विभाग को घाटा हो रहा है। - अभय सिंह, नित्या एंक्लेब
- बिजली की दर हर साल बढ़ जाती है। सरकार कहीं भी समझौता नहीं कर रही है। जबकि आम आदमी के धंधे चौपट हैं। बिजली की दरें बढ़ाकर आम आदमी के सामने दिक्कत खड़ी कर दी है। पहले एक हजार माह का बिल आता था, अब दो से ढाई हजार रुपये से कम नहीं आता है। इससे बिल जमा नहीं हो पा रहा है। - धर्मेंद्र कुमार, आसफाबाद
- बिजली विभाग को घाटा होना अधिकारियों की विफलता है। इसका खामियाजा बिजली विभाग को देना पड़ता है। कमाई का मोटा हिस्सा बिजली बिल में चला जाता है। उपभोक्ता बार-बार बिल बढ़ने से परेशान हैं। बिजली इतनी महंगी है कि पहले ही दम निकला हुआ है। सरकार इस समय दरें न बढ़ाए। - नीटू जैन, गुंजन कालोनी
- आज हर व्यक्ति रोजी, रोटी के लिए परेशान है। सरकार ने बच्चों की फीस में भी छूट नहीं की। बिल भी बढ़ा रही है तो जनता को कैसे राहते मिले। सरकार बिजली का बिल कम न करे तो बढ़ाए भी नहीं, जो उपभोक्ता बिल जमा करते हैं, उन पर ही लगातार भार डाला जाता है। - मनोज कुमार, शिकोहाबाद