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Firozabad News: दूसरे शहर में रहने वाले रिश्तेदारों पर भी चलेगा घरेलू हिंसा का केस

Fri, 26 Dec 2025 01:44 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
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फिरोजाबाद। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-1 सुनील कुमार सिंह ने घरेलू हिंसा के एक मामले में ननद और ननदोई को राहत देने से मना करते हुए निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया है। इन दोनों आरोपियों के खिलाफ निचली अदालत ने कार्यवाही समाप्त कर दी थी। अब एडीजे कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल नौकरी के कारण दूसरे शहर में रहने या आधार कार्ड पर अलग पता होने मात्र से यह नहीं मान लिया जा सकता कि आरोपी कभी साझा गृहस्थी का हिस्सा नहीं रहे।
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यह मामला गायत्री निवासी हरीनगर, टूंडला से जुड़ा है। गायत्री ने पति पंकज रावत की मृत्यु के बाद ससुराल वालों पर घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराया। अपनी सास मिथलेश देवी मूल निवासी हरीनगर टूंडला व हाल निवासी साकेत कॉलोनी, हाथरस व ननद गुंजन गर्ग और ननदोई आदित्य कुमार निवासी सेक्टर-5, आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा, आगरा के सहित बड़े ननदोई राजेश और ननद नीरज के खिलाफ उलाहने और पति की मौत के बाद संपत्ति हड़पने की नीयत से दी गई प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए वाद दायर किया था।
इसके खिलाफ आदित्य और गुंजन ने निचली अदालत में तर्क दिया था कि वह 2009 से मुंबई में इंडियन कस्टम्स में कार्यरत हैं और वहीं परिवार के साथ रहते हैं। बताया उनका गायत्री के साथ कोई घरेलू संबंध नहीं रहा है। इस पर ग्राम न्यायालय टूंडला ने 4 अक्टूबर 2021 को ननद गुंजन और ननदोई आदित्य कुमार को राहत देते हुए उनके खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए गायत्री ने अपील दायर की। गायत्री का आरोप था कि उसकी शादी (29 जनवरी 2019) से लेकर पति पंकज रावत की मृत्यु (20 अप्रैल 2019) और उसके तीन महीने बाद तक ये लोग संयुक्त रूप से साथ रहे और उन्हें प्रताड़ित किया। अपर सत्र न्यायालय ने इस तर्क को सही माना। इसी आधार पर कोर्ट ने आदेश दिया है कि ननद और ननदोई के खिलाफ ये आरोप साक्ष्य का विषय हैं और बिना गवाही व सबूतों के इन्हें शुरुआती स्तर पर ही गलत मानकर कार्यवाही समाप्त करना विधि सम्मत नहीं है।
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