एआरटीओ कार्यालय पर डीएम का छापा, पांच दलाल दबोचे
- फोटो : अमर उजाला
डीएम निधि केसरवानी ने एआरटीओ कार्यालय में छापेमारी की तो विभाग में हड़कंप मच गया। कई दलाल बाउंड्री फलांगकर भागे। डीएम ने अभिलेखों के साथ मौजूद मिले पांच दलालों को पुलिस को सौंपते हुए जेल भेजने के आदेश दिए। कार्यालय के सभी पटलों पर प्राइवेट कर्मचारी काम करते मिले। एआरटीओ प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगने के साथ ही प्राइवेट कर्मचारियों के खिलाफ अभियोग दर्ज कराने के आदेश दिए।
डीएम निधि केसरवानी गुरुवार को नगर मजिस्ट्रेट सुरेंद्र बहादुर यादव एवं सीओ सदर राजेश चौधरी के साथ सुबह 10:30 बजे एआरटीओ कार्यालय पहुंची। डीएम को देख कार्यालय में हड़कंप मच गया। कार्यालय परिसर में घूम रहे दलाल भाग खड़े हुए। कई बाउंड्री को फलांगकर कर भाग गए। मौके से पुलिस ने इशान, धीरेंद्र, प्रशांत राठौर, अजीत कुमार, सुनील कुमार को दबोच लिया। डीएम ने पांचों को जेल भेजने के निर्देश दिए। कुछ लोगों ने दलालों को छुड़वाने की कोशिश की लेकिन डीएम ने किसी की भी नहीं सुनी। डीएम ने एआरटीओ कार्यालय में प्रत्येक पटल की जांच की। पटलों के निरीक्षण के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। उन्होंने जिस पटल को देखा उसी पर प्राइवेट कर्मचारी काम करता मिला। डीएम ने प्राइवेट कर्मी सत्यम गुप्ता, शुभम, राजकुमार, रनवीर सिंह, शिवा, पवन शर्मा, सेवानिवृत्त कर्मचारी भूदेव सिंह कार्यालय के चपरासी योगेश सिंह पुत्र गौतम सिंह, कार्यालय लिपिक विवेक भटनागर के भाई रवी अनाधिकृत रूप से काम करते मिले। डीएम ने एआरटीओ प्रशासन नीतू सिंह से कहा इन पटलों पर प्राइवेट व्यक्ति या कार्यालय के कर्मचारियों के परिवारीजन अनाधिकृत रूप से कैसे कार्य करते हैं। उनके पास कोई जवाब नहीं था। उन्होंने कहा वास्तिविक आवेदकों के कार्य क्यों नहीं होते। डीएम ने एआरटीओ प्रशासन को निर्देश दिए कि कार्यालय के पटलों पर अनाधिकृत रूप से कार्य करने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए।
नगर मजिस्ट्रेट करेंगे सत्यापन
डीएम निधि केसरवानी ने एआरटीओ कार्यालय में पटलों पर मिले प्राइवेट कर्मचारियों की जांच नगर मजिस्ट्रेट सुरेंद्र बहादुर यादव को दी है। डीएम ने कहा कि इनका सत्यापन करने के साथ इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। ताकि आम जनता का काम आसानी से हो सके।