विषम परिस्थिति में भी नहीं छोड़ें धर्म और संस्कार
नगला शिवलाल में आयोजित भागवत कथा में विष्णु चैतन्य महाराज के प्रवचन
संवाद न्यूज एजेंसी
टूंडला। भक्तों के पापों का हरण कर लेने वाला ही ईश्वर है। श्रीमद् भागवत कथा सुनने का लाभ तभी है जब हम इसे अपने जीवन में उतारें और उसी के अनुरूप व्यवहार करें। यह प्रवचन नगला शिवलाल में आयोजित श्रीमद् भागवत में कथा व्यास विष्णु चैतन्य महाराज ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि कथा सुनने से मानव जीवन में संस्कार का उदय होता है। जीवन में कितनी भी विकट परिस्थिति क्यों न आ जाएं मुनष्य को अपना धर्म और संस्कार नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसे ही मनुष्य जीवन के रहस्य को समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान संसार से जुड़े भी हैं और अलग भी हैं। आकाश में बादल रहता है। और बादल के अंदर भी आकाश तत्व है। बादल के गायब होने पर भी आकाश गायब नहीं होता। इसी तरह संसार गायब होने पर भी परमात्मा गायब नहीं होते। संसार की कोई भी वस्तु भगवान से अलग नहीं है। भागवत कथा में राकेश कुमार, सुधीर कुमार, अनिल कुमार, मनीष चौधरी, बिपिन कुमार, मनोज कुमार, सनोज, रवि कुमार संजू, प्रवेंद्र का सहयोग रहा।