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कामयाबी में बाधा नहीं विकलांगता

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विकलांगता चाहे कैसी भी, लेकिन हौसले की ताकत सबको पछाड़ देती है। विकलांग है तो क्या हुआ, क्योंकि ऐसे लोग बुलंद इरादों से मुकाम तक पहुंचने की उड़ान भरते हैं। सुहागनगरी में ऐसे लोगों की कमी नहीं हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में शिखर पर पहुंचकर विकलांगता को ठेंगा न दिखाया हो। विकलांगता को मन से निकाल कर कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने लोगों को रोजगार दिया है। वहीं सरकारी सेवाओं में भी अच्छे पदों पर बैठे हैं।
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देवकी नगर निवासी कमलकांत की कहानी भी जीवन से हारे हुए लोगों को फिर से आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। विकलांग होकर भी उन्होंने दर्जन भर लोगों को रोजगार दिया है। दोने-पत्तल लगाने की फैक्ट्री खोली है। इसमें करीब आधा दर्जन विकलांगों को रोजगार दिया है। विकलांगों का उत्साहवर्धन करने के लिए कमलकांत ने श्री सांई विकलांग सेवा समिति भी बनाई है, जो विकलांग लोगों का समय-समय पर हौसलाअफजाई करती है। कमलकांत का कहना है कि ऐसी मुश्किल घड़ी में हमें संघर्ष करना चाहिए। विकलांगों के प्रति लोगों को अब सोच बदलनी होगी। इसे अभिशाप के रूप में ना देखें। उत्साह के साथ कार्य किया जाए तो सक्षम लोगों से भी आगे निकला जा सकता है।

एसबीआई बैंक में असिस्टेंट पद पर सेवा दे रहे इंद्रेश
तिलक नगर निवासी इंद्रेश चौहान का जीवन भी चुनौतियों से कम नहीं है। विकलांगता ने जकड़ लिया, मगर काबलियत से उसे भी मात दे डाली। पढ़ाई में काबलियत रखने वाले इंद्रेश का बीटीसी में चयन हो गया। लेकिन इच्छा सिर्फ शिक्षक बनने की ही नहीं थी, बल्कि चुनौती पूर्ण जॉब को हासिल करने की थी। इंद्रेश ने बैंक परीक्षा की तैयारी की और चयन हो गया। आज वह एसबीआई भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में असिस्टेंट कस्टमर सपोर्ट एंड सेल्स पद पर कार्यरत है। वह कहते हैं कि अगर विकलांगता के बारे में सोचना ही बंद कर दिया तो जीवन मुश्किल नहीं लगता। ऐसे ही हर विकलांग व्यक्ति को संघर्ष कर विकलांगता पर जीत हासिल कर लेनी चाहिए।
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संगीत में मास्टर है तो अकाउंट में भी होशियार
सुहागनगर निवासी अर्पित गुप्ता संगीत में मास्टर है तो अकाउंट में भी होशियार है। 23 वर्षीय अर्पित जन्म से ही ऑस्थियों पोरोसिज जेनेटिक इनपरफेक्टा बीमारी से शिकार हो गए। जिसकी वजह से अर्पित को करीब 70 बार हड्डियों में फ्रेक्चर हो चुका है। शरीर का विकास रुकने की वजह से लंबाई करीब तीन फुट है। अर्पित ने रानीवाला मार्केट में ज्वैलर्स की दुकान पर अकाउंट्स तैयार करता है। वहीं, घर आकर पिता नरेश चंद्र गुप्ता के बिजनेस के अकाउंट्स बनाता है। म्यूजिक गायन में प्रभाकर की डिग्री मिलने के बाद अर्पित ने करीब 40 लोगों को प्यानो, गिटार आदि भी सिखा दिया है।
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