धन की लक्ष्मी एवं गणेशजी का आज घर-घर पूजन होगा। प्रतिष्ठानों, गोदामों, कारखानों के साथ ही घरों पर पूजा अर्चना की तैयारी हर कोई करता दिखाई दिया। महंगाई के तड़के ने दीपावली के त्योहार की मिठास को कम किया है। बाजारों में ग्राहकों की भीड़ दिखाई दी।
नरक चतुर्दशी पर बाजार में खरीदारी करने वालों की भीड़ पिछले साल के अपेक्षाकृत कम दिखाई दी। हालांकि रेडीमेड, ज्वेलरी, इलेक्ट्रानिक्स की दुकानों पर ग्राहक खूब पहुंचे। बहीखातों की खरीदारी होती दिखाई दी। बुक स्टाल संचालकों ने इसकी खास तैयारी की थी। इसके अलावा कृतिम फूलों की मालाओं के साथ घर पर रंगोली सजाने, कलेंडरों की दुकानों पर ग्राहकों की लाइन लगी थी। महिलाएं घरों के लिए कूंचा, फूल एवं सींक झाड़ू की खरीद रही थीं। इसके साथ ही पुराने तहसील प्रांगण में सजे अस्थाई बाजार में मिट्टी के दीपक दस के 25, बड़ा दीवला पांच रुपया एवं नक्कासीदार दीवले एक एवं दो रुपया के मिल रहे थे। स्टेंड वाला दीवला दस रुपया का एक मिल रहा था।
20 रुपये से लेकर पांच हजार तक के गणेश लक्ष्मी
बाजार में सजी गणेश व लक्ष्मी की मूर्तियों की कीमत भी आसमान छू रही थी। मुख्य बाजार में फड़ पर 20 रुपये से गणेश लक्ष्मी की शुरूआत के साथ पांच हजार तक का जोड़ा था। यदि इनमें पांच मूर्तियां लेंगे तो फिर कीमत कम से कम 50 तथा 12 से 14 हजार की होगी।
ख्ूाब बिके गिफ्ट पैक
दीपावली के मौके पर मिष्ठान की दुकानों पर सन्नाटा था। कंपनियों के गिफ्ट पैक की डिमांड सर्वाधिक रही। 285 से लेकर 590 रुपया कीमत तक के वीकाजी, हल्दीराम के साथ ही कई अन्य ही ब्रांडों के गिप्ट पैक बाजार में बिक रहे थे। इधर बाजारों में देशी घी का मिष्ठान 360 रुपया प्रति किलोग्राम की दर से मिल रहा था। वनस्पति से तैयार होने वाले मिष्ठान बाजार में 180 रुपया से 240 रुपया प्रति किलोग्राम तक बिक रहा था। 450 रुपया में मिलने वाले गिफ्ट पैकों में मिष्ठान के साथ नमकीन थी।
खील, बतासों पर महंगाई का तड़का
बाजार में सजी खील बताशों पर महंगाई का तड़का दिखा। खील 60 रुपया से लेकर 120 रुपया प्रति किलोग्राम तक वहीं खिलौने 60 से लेकर 70 रुपया, गुट-गुटे 60 रुपया तथा बतासे 60 रुपया मीठी पट्टी सौ रुपया किलोग्राम बिक रही थी। महंगाई होने के कारण कोई आधा किलो ग्राम तो कोई 250 ग्राम ही खरीदता दिखाई दिया।
सीता-गीता, मुर्गाछाप पटाखों की रही सर्वाधिक डिमांड
मंगलवार दोपहर को पटाखा बाजार दमक उठा। हर कोई अपनी सामर्थ के अनुरूप पटाखों की खरीदारी करता दिखाई दिया। सीता-गीता का पैकिट 70 से लेकर 80 तथा एक हजार दाने, पांच हजार दाने की चटाई के साथ लाइट एवं चकरी पटाखों की डिमांड रही। देर रात्रि तक पटाखा बाजार में खरीदारी चलती रही। गांधी पार्क में लगी दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ तो थी लेकिन थोक की दुकानों के खुले होने के कारण ग्राहक कम ही पहुंच रहे थे। हालांकि शाम के वक्त दुकानों पर ही खरीदारी करने पहुंचे।
महंगी मिलेगी फूलमाला गेंदा का कम हुआ उत्पादन
दीपकोत्सव पर गेंदा एवं गुलाब की फूलमाला के बजाय कृतिम फूलों की माला से ही काम चलाना होगा। क्योंकि कम बारिश होने के कारण गेंदा का उत्पादन जिले मे काफी कम हुआ है। यही कारण रहा कि दीपावली से एक दिन पूर्व बाजार में गेंदा के फूल की बिक्री करने वाले एवं फड़ सजाने वाली कम ही दिखाई देंगे। मालाएं दस रुपया से लेकर 20 एवं 25 रुपया तक की मिल रही थी। वहीं गुलाब की माला तो मिल ही नहीं पा रही है।