जसराना। प्रतिवर्ष माघ माह में जसराना के गांव पैढ़त में आयोजित होने वाले जखई महाराज के मेले की पहली जात (दर्शन) के लिए श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान लोगों ने जखई महाराज के दर्शन कर सुख एवं समृद्धि की कामना की। मंदिर प्रबंधन के अनुसार अगले शनिवार को भक्तों का रैला उमड़ेगा। शनिवार की देर रात तक भक्तों का आना जारी रहा।
पृथ्वीराज चौहान कालीन जखई महाराज के मंदिर पर प्रतिवर्ष माघ माह में मेले का आयोजन होता है। शनिवार एवं रविवार को विशेष दर्शन होते हैं। रविवार को होने वाली पहली जात के लिए शनिवार को देर रात तक मंदिर तक पहुंचने वाले भक्तों का क्रम जारी रहा। इस दौरान सुरक्षा के लिहाज से मंदिर प्रबंधन एवं पुलिस प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए। मैनपुरी, कन्नौज, इटावा, औरैया, कानपुर, लखनऊ, हरदोई आदि पूर्वी जनपदों के साथ दिल्ली, एमपी, राजस्थान, हरियाणा से भी लोग जखई महाराज के दर्शनों के लिए भक्तगण पहुंचे। सीओ जसराना अमरीश कुमार सिंह ने कहा भक्तों की सुरक्षा एवं उमडने वाली भीड़ को देखते हुए पर्याप्त प्रबंधन किए गए हैं। आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों को रोकने के लिए पार्किंग की व्यवस्था की गई है।
पृथ्वीराज चौहान से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
जखई महाराज के मंदिर का इतिहास पृथ्वीराज चौहान से जुड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जखई महाराज पृथ्वीराज चौहान के सेनापति थे। पृथ्वीराज एक बार संयोगिता का हरण करके ला रहे थे। तभी रास्ते में जयचंद की सेना के साथ उनका युद्ध हो गया। लड़ते-लड़ते दोनों दलों की सेनाएं पैढ़त तक आ गईं। जहां पर दोनों पक्षों में युद्ध हुआ। युद्ध भूमि में जयचंद की सेना ने पृथ्वीराज के सेनापति जखई का सिर काट दिया, लेकिन सिर कटने के बाद भी जखई महाराज के धड़ ने युद्ध करते हुए प्रेमी जोड़े की रक्षा की। जहां जखई महाराज का धड़ गिरा, वहीं उनके अनुयायियों ने मंदिर बनवाया।