कर्ज माफी की मांग को लेकर स्वंय सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने शुक्रवार को बाईपास मार्ग ठप कर दिया। कर्ज की किश्त न चुकाने पर प्रतिदिन 10 रुपये की पेनाल्टी लगने के महिलाओं ने सैलई चौराहे को तीन घंटे तक जाम रखा। बुधवार और गुरुवार को प्रदर्शन करने के बाद भी प्रशासन ने कोई हल नहीं निकाला इसी का परिणाम रहा कि वह पुलिस के लिखित आश्वासन के बाद भी जाम खोलने को तैयार नहीं रहीं।
रामगढ़ थाना क्षेत्र के मोहल्ला सैलई, अम्बेड़कर पार्क, नगला मिर्जा बड़ा आदि क्षेत्र में निवास करने वाली अधिकतर महिलाएं मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने को उज्जवल जीवन, एसकेएस और सैटिन क्रेडिट केयर नेटवर्क लिमिटेड आदि कंपनियों से बीस से तीन हजार रुपये ब्याज पर लिए हैं। कंपनी संचालकों ने सात महिलाओं का एक समूह बनाकर उसमें एक महिला को मुखिया बना दिया। मुखिया महिला समूह की अन्य सदस्यों से रुपये लेकर प्रत्येक माह कंपनी में किश्त जमा करती हैं। इसके लिए महिलाओं को एक कार्ड भी दिया जाता है। इसमें लेनदेने की एंट्री की जाती है। नोट बंदी के कारण महिलाएं एक माह से किश्त अदा नहीं कर पाईं है। इस पर कंपनी संचालकों ने महिलाओं से दस रुपये रोज की पेनाल्टी लगाना शुरू कर दिया। इसको लेकर महिलाओं में शुक्रवार को आक्रोश फैल गया। उन्होंने बाईपास मार्ग स्थित सैलई पुलिया पर जाम लगा दिया। करीब एक घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची, महिलाओं को समझाते हुए जाम खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन महिलाएं किसी भी कीमत पर जाम खोलने के लिए तैयार नहीं थी। कोतवाल रामगढ़ अनिल कुमार ने लिखकर भी दिया कि आप लोगों से न तो ब्याज लिया जाएगा और न ही पेनाल्टी। इसके बाद भी महिलाएं जाम खोलने के लिए राजी नहीं थीं। तीन घंटे बीत जाने के बाद बसपा नेता टीटू प्रधान और जितेंद्र निमेष मौके पर पहुंचे। उन्होंने महिलाओं को समझाते हुए जाम खुलवाने की अपील की। इसके बाद महिलाएं बाईपास मार्ग से हटी।
महिला की बेहोश होते ही मची भगदड़
जाम की दौरान सैलई निवासी सत्यादेवी की हालत बिगड़ गई। वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी। महिला के बेहोश होते ही महिलाओं में भगदड़ मच गई। महिला कांस्टेबलों के साथ अन्य महिलाएं सत्यादेवी को बाईपास मार्ग से उठाकर खुले में ले गई और पानी पिलाया। तब कहीं जाकर महिला को होश आया।
ब्याज सहित वसूली जाती है दी गई रकम
समूह से जुड़ी सीमा, ज्योति, सुनीता, ईश्ववरीदेवी, अनीता, आशादेवी, संतोषी, रुविंस, नीरज आदि का कहना है कि कंपनी संचालक कर्ज पर दस प्रतिशत की ब्याज वसूलते हैं। 20 हजार रुपये कर्ज देंगे तो उस पर दो हजार रुपये ब्याज के जोड़कर 22 हजार रुपये की किश्त बना दी जाती है। इस किश्त को समय से अदा न करने पर दस रुपये प्रतिदिन की पेनाल्टी भी वसूली जाती है।