अप्रैल माह के आगाज के साथ गर्मी ने रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान बढ़ते ही पानी की मांग बढ़ने लगी है। ऐसे में पानी के पाउच की बिक्री में भी इजाफा हो गया है। वहीं पाउच संचालक अधिक पाउच बेचने के लिए गुणवत्ता से भी समझौता कर रहे हैं। प्लांट संचालक मानकों को ताक पर रखकर एक दिन में हजारों पानी के पाउच की बिक्री कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अफसरों का इस ओर ध्यान नहीं है।
सुहागनगरी में गर्मी में सार्वजनिक स्थलाें पर छोटी-बड़ी दुकानों, खोखों पर धड़ल्ले से पानी के पाउच बिक रहे हैं। शहर के प्रमुख भीड़भाड़ वाले इलाकों नगला भाऊ, सुहाग नगर, सुभाष तिराहा, बसस्टैंड, रेलवे स्टेशन, जिला अस्पताल, जलेसर रोड, कोटला रोड, नगला बरी, जाटवपुरी, आसफाबाद से जिला मुख्यालय तक पानी के पाउचों की बिक्री सर्वाधिक है। प्लांट संचालकों द्वारा मानकों को ताक पर रखकर पानी के पाउच की पैकिंग कराई जा रही है। शहर में बिकने वाले अधिकांश पानी के पाउच पर पैकिंग की तिथि तक अंकित नहीं होती है और न ही एक्सपायरी डेट। सुहागनगरी में कुछ प्लांट संचालक ग्राउंड वाटर का इस्तेमाल पानी के पाउच भरने के लिए करते हैं। पालीथिन में पैक होने के बाद पानी और अधिक हानिकारक हो जाता है, लेकिन जिला प्रशासन व नगर निगम के अफसर पानी के पाउच की बिक्री पर रोक लगाने को गंभीर नहीं है।
फिल्टर जैसे स्वाद को कर रहे केमिकल का प्रयोग
कुछ ऐसे इलाके हैं, जहां सप्लाई के पानी को टंकी में स्टोर करने के बाद में पाउच में पानी भरकर बेचा जाता है। वहीं जानकारों का मानना है एक ऐसा केमिकल आता है, जिसे डालने पर पानी का स्वाद फिल्टर जैसा लगता है। इन पाउच पर न तो मिनरल के बारे में और न की कंपनी के बारे में लिखा होता है।
आमजन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं पाउच
जिला उपभोक्ता संरक्षण समिति के अध्यक्ष निर्मल कुमार जैन का कहना है कि गर्मी के सीजन में बिना पैकिंग तिथि और एक्सपाइरी डेट के पानी की पाउच की बिक्री हो रही है। यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धज्जियां उड़ा रहे हैं। प्लांट संचालक मानक के विपरीत पानी के पाउच की बिक्री कर जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। इन्हीं पानी के पाउच से तरह-तरह की बीमारियां फैल रही हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से ऐसे प्लांट संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पानी पाउच से अटे नाले-नालियां
पानी के पाउचों को पीने के बाद लोगों द्वारा उन्हें इधर-उधर फेंक दिया जाता है। कई स्थानों पर पाउचों से नाले-नालियां अटी पड़ी हैं। लोगों का कहना है कि सरकार इस पर प्रतिबंध लगाते हुए प्रभावी कदम उठाए। विशेषज्ञों की मानें तो शहर में बेचे जा रहे पाउचों की फैक्ट्री भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण में (एफएसएसआई) पंजीकृत नहीं हैं।