रामलीला चौराहा स्थित रामद्वार गेट
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फिरोजाबाद। देश के कोने-कोने में सुहागनगरी की कांच की रंग बिरंगी चूड़ियां पहनी जाती हैं। यहां की चूड़ियों की खनक जितनी मशहूर है उतना ही यहां का रामलीला मेला महोत्सव। लगभग 150 पूर्व सुहागनगरी में रामलीला का मंचन शुरू हुआ था। तब से यह मेला तमाम उतार चढ़ाव के बीच भव्य रूप लिए हुए है।
फिरोजाबाद का रामलीला मैदान भव्य रामलीला मंचन के लिए जाना जाता है। आगरा के गजेटियर के अनुसार फिरोजाबाद में रामलीला मेला का मंचन 1870 में लाला बद्री प्रसाद अग्रवाल सूतवालों ने शुरू कराया था। सन 1880 में रामलीला का मंचन रामलीला मैदान से शुरू हुआ। तब समाजसेवी कन्हैया लाल गोइंका ने आयोजन की जिम्मेदारी ली। वर्षों तक वह रामलीला का मंचन कराते रहे। रामलीला परिसर में समाजसेवी कन्हैयालाल गोइंका की प्रतिमा भी लगी हुई है। 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इस प्रतिमा का अनावरण किया था। तब भी यहां के रामलीला मंचन की ख्याति दूर-दूर तक फैली थी। 1961 में समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया भी रामलीला का मंचन देखने आए थे।
कौमी एकता की मिसाल रहा है यह मेला महोत्सव
फिरोजाबाद। रामलीला मेला महोत्सव कौमी एकता की मिसाल रहा है। बताते हैं कि लाल विशंभर दयाल और मिर्जा खैराती लाल बेग के बीच पीढ़ी दर पीढ़ी व्यापारिक संबंध थे। मिर्जा खैराती लाल बेग का परिवार जब पाकिस्तान गया तो अपने हिस्से की जमीन को रामलीला के लिए दान दे गया। रामलीला मेला महोत्सव के दौरान निकाले जाने वाले भरत के डोले का स्वागत शेख लतीफ मिर्जा के परिवार द्वारा किया जाता था।