राजा का ताल मंदिर में लगी प्राचीन प्रतिमाएं।
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फिरोजाबाद। शहर से छह किलोमीटर दूर राजा का ताल स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर चार सौ साल पुराना है। यह प्राचीन शिखरबंध भव्य कलशीय मंदिर है। गांव की पहचान जिस ताल से है, उसे राजा टोडरमल ने वर्ष 1707 में इस ताल को खुदवाया था। इस ताल में राजा की सेना में शामिल हाथी, घोड़े पानी पीने आते थे। इसके चारों ओर चूने की दीवार खड़ी कराई। जब भी राजा टोडरमल यहां से गुजरते थे, वो इस मंदिर के दर्शन करके जाया करते थे।
दिगंबर संतों का रहता है प्रवास
राजा का ताल मंदिर में बड़े जैन साधुओं का ससंघ प्रवास रहा है। यहां पर आचार्य विमल सागर महाराज संघ, आचार्य विद्या सागर, आचार्य विद्यानंद सहित अनेक आचार्यों ने आगमन किया है।
मूल नायक प्रतिमाएं हैं चमत्कारिक
मंदिर में तीन वेदियां है। मुख्य वेदी पर मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ की मनोहारी पदमासन पर काले पाषाण की प्रतिमा विराजमान है इसी वेदी पर भगवान आदिनाथ, भगवान शांतिनाथ, भगवान चंद्रप्रभु, भगवान मुनिसुव्रतनाथ एवं भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा है। दूसरी वेदी पर नवीन खड़गासन मुद्रा में भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा के साथ चौबीसी, शांतिनाथ भगवान एवं भगवान महावीर की प्रतिमा है।