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पारा 40 के पार, बंद पड़े प्याऊ से कैसे हो बेड़ा पार

Mon, 03 Apr 2017 11:16 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फिरोजाबाद
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गर्मी में पानी पीकर प्यास बुझाता एक युवक।
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अप्रैल के प्रथम सप्ताह में ही गर्मी ने रौद्रता दिखानी शुरू कर दी है। पारा 40 डिग्री से ऊपर पहुंच गया है लेकिन शहर के सार्वजनिक स्थलों और बाजारों में कहीं प्यास बुझाने का इंतजाम नहीं है। कड़ी धूप में राहगीर पानी के पाउच अथवा महंगी बोतल से प्यास बुझाने को मजबूर हैं। सार्वजनिक स्थलों पर लगी प्याऊ या तो बंद हो चुकी हैं अथवा उन पर ठेले वाले, दुकानदारों में कब्जा जमा लिया है। नगर निगम प्रशासन एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा बंद पड़ी प्याऊ को चालू कराने कोई पहल नहीं की गई।
जिला अस्पताल : यहां हर रोज सैकड़ों मरीज आते हैं। इसके बावजूद जिला अस्पताल में पेयजल का पर्याप्त नहीं है। पुरानी इमरजेंसी के सामने लगी कूलिंग मशीन महीनों से बंद पड़ी है। विभाग ने कोई सुध नहीं ली। जिला अस्पताल के पहले गेट पर बनी प्याऊ चालू रहने से अस्पताल में आने वाले मरीज व तीमारदारों को कुछ राहत अवश्य है।
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सुभाष तिराहा : यह शहर के सर्वाधिक भीड़भाड़ वाले चौराहों में गिना जाता है। यहां आजतक एक प्याऊ का इंतजाम नहीं हो सका। यात्रियों एवं राहगीरों के प्यास बुझाने के लिए छोटे-छोटे बच्चे कड़ी धूप में पानी के पानी का पाउच बेचते नजर आते हैं।
बसस्टैंड : आगरा गेट स्थित रोडवेज बसस्टैंड पर भी हर रोज सैकड़ों यात्री आते हैं। यहां पहले गेट पर बनी प्याऊ महीनों से बंद पड़ी है, जिसे अभी तक चालू नहीं कराया गया। प्रतीक्षालय के पीछे लगी प्याऊ भी बंद पड़ी है। नगर निगम द्वारा लगवाया गया वाटर एटीएम भी यात्रियों एवं राहगीरों की प्यास नहीं बुझा पा रहा। दिनभर बिजली न होने के कारण वाटर एटीमए बंद पड़ा रहता है।
शास्त्री मार्केट : यह शहर का प्रमुख बाजार है। यहां हर रोज सैकड़ों महिला-पुरुष सामान की खरीदारी करने आते हैं। पूरे शास्त्री मार्केट में कहीं प्यास बुझाने का इंतजाम नहीं है। शास्त्री मार्केट के प्रवेश द्वार बनी प्याऊ अक्सर बंद रहती है। यदि उसमें पानी भी हो तो ठेले खड़े होने के कारण राहगीर पानी नहीं पी सकते।
घंटाघर : यह चौराहा भी शहर के भीड़भाड़ वाले चौराहों में गिना जाता है। यहां हर समय वाहनों, पैदल राहगीर, दुकानदार, सामान खरीदारी करने वालों की भीड़भाड़ रहती है। घंटाघर पर बनी प्याऊ वर्षों से बंद पड़ी है। दुकानदारों का कहना है कि यहां आसपास पानी का कोई इंतजाम नहीं है। प्यास लगने पर पानी का पाउच खरीद कर पीते है।
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गली बौहरान : शहर में चूड़ी बिक्री का प्रमुख स्थान है। यहां हर रोज दूरदराज से व्यापारी चूड़ी खरीदने आते हैं। इसके अलावा शहर की महिलाएं भी हर रोज बड़ी संख्या में चूड़ियां खरीदने गली बौहरान जाती हैं। गली बौहरान में सैकड़ों चूड़ी की दुकानें एवं गोदाम भी हैं। इसके बावजूद पूरी गली में कहीं पानी का इंतजाम नहीं है। गली बौहरान के कोने पर वर्षों पुरानी प्याऊ भी बंद हो चुकी है। अब प्याऊ वाले स्थान पर भी चूड़ी की दुकान सज गई है।
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