फिरोजाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग के 69 हजार शिक्षक भर्ती के मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिले में नौकरी कर रहे 668 शिक्षकों का भविष्य भी संकट में दिख रहा है। ये हेडमास्टर बनने का इंतजार कर रहे थे और अब नए सिरे से सूची बनाने के आदेश ने नौकरी को ही लेकर चिंता बढ़ा दी है। इनमें से कई शिक्षकों ने गाड़ी, तो कुछ ने मकान बनाने के लिए बैंक से लोन ले रखा है।बीते सप्ताह शुक्रवार को हाईकोर्ट ने 69 हजार भर्ती परीक्षा की मेरिट लिस्ट को रद्द कर सरकार को तीन महीने के अंदर बेसिक शिक्षा की नियमावली और आरक्षण के नियमों का पालन करते हुए नई सूची को बनाने का निर्देश दिया है। बता दें कि 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया अक्तूबर 2020 में शुरू हुई थी। इसमें तीन चरणों में फिरोजाबाद जिले में करीब 668 अभ्यर्थी तैनात हुए थे। हाईकोर्ट के फैसले के बाद इन शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है।
शिक्षकों का कहना है कि चार साल बाद यदि नई सूची के अनुसार नौकरी से बाहर होना पड़ा तो बहुत सी नई मुश्किलें सामने आ जाएंगी। पारिवारिक खर्च, लोन और अन्य जरूरतों को भी पूरा करना है, ऐसे में नौकरी पर आया संकट परेशान करने वाला है।
आरक्षण का है मसला, शिक्षकों की बढ़ी चिंता
69 हजार भर्ती प्रक्रिया में आरोप लगाया गया था कि 19 हजार पदों पर आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किया गया है। ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी की जगह सिर्फ 3.86 फीसदी और अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों को 21 फीसदी की जगह 16.2 फीसदी आरक्षण दिया गया था। हालांकि, सरकार ने भर्ती नियमानुसार होने की बात कही थी। अब कोर्ट ने नई सूची जारी करने का आदेश दिया है।
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-हाईकोर्ट का फैसला चिंता बढ़ाने वाला है। नई सूची के परिणाम जो भी हों, जिन शिक्षकों की नौकरी जाएगी, वे आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान होंगे। सरकार को उन शिक्षकों के बारे में भी विचार करना चाहिए।
ललित कुमार, शिक्षक
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जहां कई लोगों की जिंदगी में नई सूची रोजगार लाएगी। वहीं कई शिक्षकों को सड़क पर ला देगी। सरकार को सभी का ध्यान रखना चाहिए।
शैलेंद्र कुमार, शिक्षक