कैप्टन भाई की हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए धरने पर बैठी सैनिक बहन
चुनाव के दौरान रंजिशन कैप्टन भाई की हत्या के खुलासे और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सैनिक बहन ने जिला मुख्यालय पर धरना दिया। धरने पर बहन के साथ मृतक की पत्नी और बच्चों ने भी न्याय की गुहार लगाई। प्रदर्शन में पुलिस पर आरोपियों को संरक्षण देने और लापरवाही बरतने का आरोप लगाया।
जिला मुख्यालय के बाहर कैप्टन भाई के कातिलों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए सैन्य कर्मी ममता यादव ने कहा कि उसके भाई कैप्टन आलोक की 21 फरवरी की सुबह करीब नौ बजे खैरगढ़ थाना क्षेत्र के गांव बछलई के समीप विजयपाल पुत्र शैतान सिंह, प्रदीप कुमार पुत्र विजयपाल और ललइया पुत्र श्रीकृष्ण ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इनके खिलाफ खैरगढ़ थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने ललइया को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वहीं शेष आरोपियों को पुलिस 65 दिन बाद भी गिरफ्तार नहीं कर सकी है। उन्होंने कहा कि आरोपियों के ठिकाने और उनके होने की जानकारी पुलिस को कई बार उन्होंने दी लेकिन खैरगढ़ पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास नहीं करती है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पीड़ित परिवार ने डीजीपी, मुख्यमंत्री और सपा मुखिया से तक गुहार लगाई और एसएसपी फीरोजाबाद से भी मुलाकात की लेकिन हर बार कार्रवाई का आश्वासन देकर मामले को टाल दिया जाता है। पीड़िता का आरोप है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी अथवा उनके घर की कुर्की नहीं होती वह आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।
82 के बाद 83 की कार्रवाई करना भूली पुलिस
परिवार के साथ धरने पर बैठी पीड़ित ममता का आरोप है कि आरोपियों के खिलाफ पुलिस द्वारा की गई 82 की कार्रवाई को करीब डेढ़ माह का समय बीत चुका है। इसके बाद भी पुलिस ने 83 की कार्रवाई नहीं की।
हथियार भी नहीं हुए बरामद
पीड़िता का कहना है कि भाई आलोक की हत्या के दौरान आरोपियों द्वारा प्रयुक्त हथियार अब तक बरामद नहीं हो सका है। ललइया ने गिरफ्तारी के समय पूछताछ में अंकुर के पास हथियार रखने की बात कही थी लेकिन हथियार बरामद नहीं किया गया।