पैसे की भूख ने रोहन को बना दिया किडनैपर
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और भी कारोबारी उसके निशाने पर थे
दो सौ करोड़ रुपये एकत्रित करने की थी मंशा
शहर के प्रमुख बिल्डर ललित सिंघल के निधन के बाद विरासत में मिले कारोबार को उनके दोनों पुत्र पवन सिंघल और रोहन सिंघल संभाले हुए थे। करोड़ों का कारोबार होने के बाद भी रोहन को पैसे की भूख ने हैवान बना दिया। धनवान होने की छवि की आड़ में उसने अपने ही दोस्त के अपहरण की साजिश रच डाली। पुलिस की मानें तो उसके निशाने पर शहर के और भी पैसे वाले लोग थे। इन सभी को अगवा करने की सोच उसके दिमाग में थी। वह किडनैपिंग के जरिए 200 करोड़ कमाना चाहता था।
प्रमुख उद्योगपति अतुल मित्तल के पुत्र आदित्य मित्तल के सनसनीखेज अपहरण और उनकी हत्या की घटना से पूरा शहर सन्न है। हाईप्रोफाइल हत्याकांड के बाद दोस्ती पर तो दाग लगा ही है साथ ही अन्य कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। प्रमुख कोयला व्यापारी ललित सिंघल ने उस वक्त रीयल एस्टेट के क्षेत्र में कदम रखा जब सुहाग नगरी में इसकी शुरुआत ही हो रही थी। उनके साथ शहर के कई बडे़ उद्योगपतियों ने रीयल एस्टेट में अपना पैसा लगाया था। ललित सिंघल के निधन के बाद उनके पुत्र रोहन और पवन ने कारोबार संभाला था। इन दोनों भाईयों के साथ शहर के कई नामी उद्योगपति और कारोबारी रीयल एस्टेट में अपना करोड़ों रुपया दांव पर लगाए हुए थे। रीयल एस्टेट की मंदी ने प्रोजेक्टों की गति को विराम देने के साथ ही पैसा लगाने वाले कारोबारियों की कमर तोड़ दी थी। जानकार बताते हैं कि रोहन और पवन को भी तगड़ा आर्थिक नुकसान हुआ था। इस बीच पैसे की भूख से रोहन के दिमाग में अपराधिक सोच ने जन्म लिया और उसने पूरी प्लानिंग के साथ किडनैपिंग पर अपना फोकस कर दिया।
जिले के एक पुलिस अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि 25 अगस्त की शाम को रोहन की गिरफ्तारी के बाद जब उनसे पूछताछ की गई तब उसके शातिर खेल का खुलासा हुआ। उसकी मंशा 200 करोड़ रुपये कमाने की थी। उसके निशाने पर शहर के और भी उद्योगपतियों के बेटे थे। इनसे पिछले तीन माह में एक योजना के तहत उसने नजदीकियां बढ़ा लीं थीं। लगता है कि उसकी सोच ऐसी हो गई थी कि वह पैसे वाला है, बिल्डर है और अभी तक उस पर कोई अपराधिक मुकदमा नहीं है। वह अपने नजदीकी लोगों को आसानी से अगवा कर लेगा और कोई शक भी नहीं करेगा। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इसी योजना के तहत उसने दिल्ली से विशेष वायस चेंजर मंगाया था। बेहोश करने वाली गन मंगाई थी और जलेसर रोड स्थित कर्मयोगी अपार्टमेंट में एक कमरा बनवाया था। अपार्टमेंट बनाने में वर्षों से उसके साथ काम कर रहे मजदूरों को उसने विश्वास में ले लिया था। इनमें एक मजदूर ऐसा था जिस पर खुद का मकान तो दूर झोपड़ी तक नहीं थी और वह रामलीला मैदान में खुले आसमान के नीचे सोता था। उसे दस लाख कीमत का मकान दिलाने का लालच देकर रोहन ने उसे अपहरण की योजना में शामिल किया था। पुलिस अधिकारी ने आफ द रिकार्ड बताया कि आदित्य का अपहरण उसका पहला अपराध था। लेकिन इस अपराध को करने के बाद वह किसी तरह बच जाता तो निश्चित रुप से इसी तरह की अन्य वारदातों को अंजाम देता।