फिरोजाबाद। जनपद न्यायालय में अपर जिला जज एवं विशेष जज पॉक्सो मृदुल दुबे ने दुष्कर्म के बाद बालिका की गला दबाकर हत्या की सजा सुनाए जाने से पूर्व 11 गवाहों के बयान सुने। इस दौरान चिकित्सक की टीम ने गला दबाकर हत्या तथा महिला चिकित्सक ने दुष्कर्म होने की पुष्टि करते हुए बयान दिए थे। इसके आधार पर दोषी को मृत्यु दण्ड (फांसी) की सजा सुनाई गई।
न्यायालय प्रांगण में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद काफी अधिवक्ता भी एकत्रित हो गए। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अजमोद सिंह चौहान ने कहा कि पॉक्सो कोर्ट की ओर से पहली बार किसी आरोपी को फांसी की सजा सुनाई गई है।
उन्होंने कहा कि यह सजा एक नजीर बनेगी। ताकि हमारी बेटियां सुरक्षित रह सके। आरोपी को सजा को दिलाने में मॉनीटरिंग सेल प्रभारी महेंद्र सिंह गौतम ने मय टीम एवं पैरोकार लक्ष्मण सिंह व आरक्षी जगदीश सिंह ने काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
बदले कानून के तहत मिली सजाऱ् मसूद
आरोपी पक्ष के अधिवक्ता मोहम्मद मसूद सिद्दीकी ने कहा कि निर्भया प्रकरण, हाथरस प्रकरण के बाद कानून में जो संसोधन हुए हैं उसके तहत ही आरोपी बंटू उर्फ शिवशंकर को सजा मिली है। मैंने अपनी ओर से प्रभावी ढंग से पैरवी की है।
घटना के बाद परिजनों ने बनाई दूरी
फिरोजाबाद। आरोपी बंटू उर्फ शिवशंकर के इस कदम से उसके परिजन भी शर्मसार थे। उन्होंने इस मामले में आरोपी का कोई साथ नहीं दिया। मंगलवार को न्यायालय में जब सजा सुनाई गई उस समय परिवार के कोई सदस्य मौजूद नहीं थे।
आरोपी के छलके आंसू
फिरोजाबाद। विशेष जज पॉक्सो एक्ट मृदुल दुबे ने जब आरोपी बंटू उर्फ शिवशंकर को फांसी (मृत्यु दण्ड) की सजा सुनाई तो आरोपी की आंखों में आंसू भर आए। उसने किसी को अहसास नहीं होने दिया। बल्कि आंसू अंदर ही अंदर पोछ लिए। बाद में पुलिस उसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जेल की ओर ले गई।
मृत्यु दण्ड देने पर ही न्याय संभव ऱ् जज
फिरोजाबाद। मामले में सजा सुनाए जाने से पहले अपर जिला जज एवं विशेष जज पॉक्सो एक्ट मृदुल दुवे ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अभियुक्त ने जो कृत्य किया है, वह मानवता को शर्मसार करने वाला है। अभियुक्त का कृत्य जघन्य से जघन्यतम अपराध की श्रेणी में आता है। इस प्रकरण में अभियुक्त को मृत्यु दण्ड देने पर ही न्याय संभव है। ताकि समाज स्वयं को और अपने बच्चों को ऐसे नर पिशाचों से बचा सके। इस देश में बोला जाता है कि जिस कुल में नारियों की पूजा होती है, अर्थात सत्कार होता है उस कुल में दिव्यगुण, दिव्य भोग एवं उत्तम संतान होते हैं। वहां देवता भी निवास करते हैं। वर्तमान में इस श्लोक का कोई मतलब नहीं रह गया। वह आठ वर्ष की बच्ची थी। उसने अपने जीवन को ठीक ढंग से जीना शुरू नहीं किया था। उसकी मां ने बेटी को मोतियों की माला भी पहनाई थी। जिससे वह अपनी बेटी को किंचित राजकुमारी मानती थी, किन्तु दानव के अंदर कोई रहम नहीं जागा। संवाद
बालिका के पिता बोले-मुझे खुशी है, न्याय मिला
फिरोजाबाद। जब आरोपी बंटू उर्फ शिवशंकर को फांसी की सजा सुनाए जाने की जानकारी मीडिया के माध्यम से पीड़ित पिता को मिली तो उन्होंने खुशी जाहिर की। उन्हाेंने कहा कि मेरी बेटी तो चली गई, लेकिन दोषी को सजा मिले, यही इच्छा थी। झोंपड़ी में रहने वाले पिता इस दौरान अपनी गोद में एक बेटी को थामे हुए था।