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UP: सिविल जज ने पेश की मिसाल, सरकारी अस्पताल में कराया प्रसव; बोलीं- बेहतर हैं सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं

Tue, 07 Nov 2023 12:08 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद

सार

फिरोजाबाद में सिविल जज ने मिसाल पेश की है। उन्होंने सरकारी अस्पताल में प्रसव कराया। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हैं। 
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प्रसव के बाद सिविल जज जूनियर डिवीजन श्वेता सिंह एवं परिवार के लोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुहागनगरी फिरोजाबाद में सिविल जज दंपती ने मिसाल पेश की है। सिविल जज श्वेता सिंह ने सौ शैय्या अस्पताल में प्रसव कराया है। सोमवार की सुबह चार बजे उनका सामान्य प्रसव हुआ। नवजात शिशु को सरकारी अस्पताल में ही टीके लगाए गए। जच्चा-बच्चा पूरी तरह स्वस्थ्य हैं। उन्होंने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बताया है। 

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सिविल जज जूनियर डिवीजन श्वेता सिंह गर्भवती रहने के दौरान सौ शैय्या अस्पताल में चेकअप कराने आई थीं। उन्हें चिकित्सक और स्टाफ का मरीज के प्रति व्यवहार काफी पसंद आया। सरकारी अस्पताल की सुविधाएं भी पसंद आईं। उन्होंने सौ शैय्या अस्पताल में डिलीवरी कराने का निर्णय लिया। 

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सोमवार को प्रसव पीड़ा होने पर वह अस्पताल पहुंची। सुबह चार बजे उन्हें प्रसव कराया गया। यह प्रसव स्टाफ नर्स प्रतिभा जैन ने कराया। इसके बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या चौधरी और सीएमएस डॉ. नवीन जैन ने स्वास्थ्य का परीक्षण किया। बच्चे को टिटनेस सहित अन्य टीके भी सरकारी अस्पताल में ही लगाए गए।
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श्वेता सिंह के पति प्रभात कुमार सिंह भी सिविल जूनियर डिवीजन में जज हैं। सिविल जज श्वेता सिंह ने बताया कि मैंने अनुभव किया है कि सरकारी अस्पताल में ज्यादा सुविधाएं हैं और प्रशिक्षित स्टाफ है। इसी वजह से नॉर्मल डिलीवरी सरकारी अस्पताल में ज्यादा होती हैं। मुझे यहां व्यवस्थाएं अच्छी लगीं और आमजन को संदेश भी जाए कि सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज होता है।

कोरोना काल के बाद जगा विश्वास

कोरोना काल के बाद सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर आमजन का विश्वास बढ़ा है। हर माह एक हजार से 1150 डिलीवरी हो रही है। इसमें सिजेरियन से ज्यादा नार्मल डिलीवरी की है। जबकि कोरोना काल से पहले महज 500 से 600 डिलीवरी प्रतिमाह होती थीं।

सरकारी अस्पताल में आया पहला बड़ा मामला

जिले के सरकारी अस्पताल में किसी संभ्रात परिवार का यह पहला मामला आया है कि उन्होंने सरकारी अस्पताल में डिलीवरी कराई है। यहां तक की जिला अस्पताल के चिकित्सक के परिवार भी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से दूरी बनाए रहता है।

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