फिरोजाबाद। कारखाना संचालकों की ओर से रंगीन चूड़ी के दामों में की गई 10 रुपये प्रति तोड़ा की बढ़ोतरी पर विवाद गहरा गया है। मामला प्रशासनिक दहलीज पर पहुंच गया है। इस संबंध में बुधवार को थाना दक्षिण में सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में फिरोजाबाद बैंगल्स एसोसिएशन और सिंडिकेट के पदाधिकारियों के बीच वार्ता हुई।
बैंगल्स एसोसिएशन ने बढ़ी हुई कीमतों का कड़ा विरोध करते हुए इसे नाजायज और लूट करार दिया है। एसोसिएशन का तर्क है कि जब आज भी कारखानों में गैस के बिल पुराने रेट पर ही आ रहे हैं और किसी भी अन्य चीज की लागत नहीं बढ़ी है, तो चूड़ियों के दाम बढ़ाना पूरी तरह से गलत है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट विनोद कुमार पांडेय ने एसोसिएशन के तर्कों को सही माना। उन्होंने स्पष्ट किया कि कारखानेदारों द्वारा दाम बढ़ाने के दावों की जांच किसी योग्य और जानकार विशेषज्ञ से कराई जाएगी। इसके साथ ही सिटी मजिस्ट्रेट ने सख्त निर्देश दिए कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक कोई भी कारखाना संचालक चूड़ी के रेट नहीं बढ़ाएगा। इस राहत भरे फैसले पर संस्था ने सिटी मजिस्ट्रेट का आभार व्यक्त किया है।
एसोसिएशन ने अपील, बढ़े रेट पर न खरीदें माल
वार्ता के बाद एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने शहर के सभी चूड़ी दुकानदारों से एक विशेष अपील की है कि कोई भी दुकानदार बढ़ी हुई कीमतों पर माल न खरीदें। यदि पुराना माल पुरानी कीमतों पर मिलता है, तो ही लें।
एडवांस बुकिंग और पुराने सौदों ने फंसाया पेंच
गोदाम संचालक आनंद अग्रवाल और निशांक अग्रवाल, राजीव बंसल आदि ने बताया कि कलर चूड़ी के दामों में 10 रुपये की अचानक बढ़ोतरी ने न केवल स्थानीय बाजार, बल्कि बाहरी जिलों और अन्य प्रदेशों के व्यापारियों के गणित को भी बिगाड़ कर रख दिया है। दरअसल, फिरोजाबाद के चूड़ी बाजार से देश के कौने-कौने के व्यापारी जुड़े हुए हैं। शहर के कई गोदाम संचालकों ने बाहरी प्रदेशों और जिलों के बड़े व्यापारियों से पुरानी दरों पर ही लाखों रुपये का एडवांस (अग्रिम भुगतान) ले रखा है। अब नए बढ़े हुए रेट के कारण उनके सामने यह संकट है कि वे पुराने रेट पर माल कैसे दें। यदि गोदाम संचालक पुरानी दरों पर माल की डिलीवरी देते हैं, तो उन्हें सीधा भारी आर्थिक घाटा उठाना पड़ रहा है। दूसरी तरफ, बाहर के व्यापारी एडवांस दिए जा चुके माल को नई (बढ़ी हुई) दरों पर खरीदने से साफ कतरा रहे हैं, जिससे करोड़ों रुपये के सौदे अधर में लटक गए हैं।