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Firozabad News: अस्थमा की चपेट में बच्चे और बुजुर्ग, हर रोज जिला अस्पताल पहुंच रहे 10 मरीज

Tue, 02 May 2023 12:09 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
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अस्थमा की चपेट में बच्चे और बुजुर्ग, हर रोज जिला अस्पताल पहुंच रहे 10 मरीज निजी अस्पतालों में भी उपचार करवा रहे हैं काफी संख्या में लोग
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संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। विश्व अस्थमा दिवस दो मई को मनाया जाता है। अस्थमा सांस की गंभीर बीमारियों में से एक है। इस बीमारी के कारण कई बार लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल हो जाता है। यदि समय पर उपचार न मिले तो स्थिति काफी गंभीर भी हो सकती है। इसलिए जिन लोगों को अस्थमा की दिक्कत होती है, उन्हें अपने स्वास्थ्य को लेकर बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है। केवल बड़े या बुजुर्ग ही नहीं बल्कि बच्चे भी अस्थमा की चपेट में आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में हर रोज 10 बुजुर्ग और बच्चे सांस लेने में आ रही दिक्कत के चलते उपचार के लिए आ रहे हैं। जबकि प्राइवेट अस्पतालों में पहुंच रहे मरीजों की संख्या तो इससे कई गुणा ज्यादा हैं।
मेडिकल कॉलेज के मेडिसन विभाग के अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि अस्थमा होने पर फेफड़े कमजोर हो जाते हैं। जिससे इंफेक्शन हो जाता है। लंबे समय तक हल्की खांसी व लगातार छींक आना भी अस्थमा के संकेत होते हैं। इसलिए इन्हें अनदेखा नहीं करना चाहिए। उनकी ओपीडी में रोजाना 10 मरीज तो ऐसे आ रहे हैं जो अस्थमा से पीड़ित होते हैं।
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ज्यादा निमोनिया बनता है दमा का कारण : डॉ. विवेक
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक अग्रवाल ने बताया कि बच्चे भी अस्थमा की चपेट में आ रहे हैं। श्वास नकली सिकुड़ने पर बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। जिन बच्चों में अस्थमा की दिक्कत है उन्हें धूल, मिट्टी, धुएं से दूर रहना चाहिए। हरी सब्जी व फल ज्यादा खाने चाहिए ताकि शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी रहे। 100 में से 10 बच्चे ऐसी ही बीमारी से ग्रस्त आ रहे हैं। सांस लेने संबंधी बीमारी जन्मजात भी हो सकती हैं लेकिन कुछ बच्चों में यह उम्र के हिसाब से ठीक हो जाती है और कुछ में नहीं। ज्यादा निमोनिया होना दमा का बड़ा कारण बनता है।

अस्थमा का उपचार
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. डीके गुप्ता ने बताया कि अस्थमा की समस्या कितनी गंभीर है, इस आधार पर इसका इलाज किया जाता है। डॉक्टर कुछ दवाइयां देते हैं जिससे अस्थमा अटैक में तुरंत मदद मिल सके। इसमें कुछ दवाएं अस्थमा अटैक से बचाव के लिए दी जाती हैं। जिन लोगों को यह समस्या है उन्हें निरंतर बचाव व सावधान रहने आवश्यक होती है। अस्थमा रोगियों को हमेशा अपने पास इन्हेलर रखना चाहिए। हर रोज 10 मरीज सांस से जुड़ी समस्या लेकर ओपीडी में आ जाते हैं
ये हैं लक्षण
अस्थमा के लक्षणों में मुख्य रूप से सांस लेने में कठिनाई होने लगती हैं, क्योंकि श्वास नलियों में सूजन आने के कारण श्वसन मार्ग सिकुड़ जाता है। इसके अलावा खांसी, घबघराहट तथा सीने में जकड़न व भारीपन होना, फेफड़ों में लंबे समय तक कफ जमे रहना, नाड़ी गति का बढ़ जाना, सांस लेते समय सीटी की आवाज का आना आदि भी अस्थमा के लक्षण हैं।
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बचाव के उपाय
अस्थमा रोगी को चिकित्सक द्वारा बताई जाने वाली दवाई समय पर लेनी चाहिए। शाम को भाप लेने से भी आराम मिलता है। व्यक्ति को स्वच्छ वातावरण में रहना चाहिए। धूल आदि से दूर रहना चाहिए। इनहेलर का प्रयोग करना चाहिए। ठंडी चीजों से परहेज करना चाहिए। धूम्रपान व किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहना चाहिए।
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