फिरोजाबाद। सुहागनगरी फिरोजाबाद का नाम सुनते ही कानों में चूड़ियों की खनक गूंजने लगती है, आंखों के सामने फैंसी कांच से बने आयटम और कड़ा नजर आने लगते हैं। इसी सुहागनगरी के लिए दूसरे प्रांतों के श्रमिक चुनौती बन गए हैं। रोजगार की तलाश में दूसरे प्रदेशों से फिरोजाबाद आए मजबूर हुनर हाथ में आते ही कारोबार छीन रहे हैं। बढ़े पैमाने पर मजदूरों ने फिरोजाबाद से काम छीनने के बाद राजस्थान के जयपुर और मध्य प्रदेश के इंदौर के अलावा बिहार में फैंसी चूड़ी व कड़े का निर्माण शुरू कर दिया है। इससे सुहागनगरी के कारोबार पर संकट दिखाई दे रहा है। वहीं काम कम होने से हजारों मजदूरों का रोजगार छिन गया है। दशकों पुराना शहर का परंपरागत चूड़ी कारोबार दूसरे प्रांत व शहर में शिफ्ट होने की आशंका दिनों दिन गहराती जा रही है। जयपुर से सटे प्रमुख चूड़ी बाजार नाहर रोड, श्रमिक बस्ती भट्ठा बाजार के अलावा इंदौर एवं उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती बिहार प्रांत के कई जिलों के कारीगर फिरोजाबाद के चूड़ी स्टॉक व कारखानों से सादा चूड़ी खरीद कर अपने गृह जनपद ले जा रहे हैं। लॉकडॉउन के दौरान कांच नगरी में रहकर फैंसी कांच चूड़ी व कड़ा बनाने का हुनर सीखने के बाद दूसरे प्रांत के श्रमिक अब अपने गृहनगरों में ही फैंसी चूड़ी और कड़ा तैयार कर रहे हैं। उसी प्रांत के चूड़ी कारोबारी व शोरूम में माल की सप्लाई भी देने लगे हैं। वहीं फैंसी कांच चूड़ी व कड़ा का काम दूसरे प्रांतों में शुरू हो जाने से शहर की दो दर्जन से अधिक श्रमिक बस्तियों में हजारों चूड़ी कामगार के हाथ से रोजगार छिन गया है।
लाख और मेटल के प्रति आकर्षण पड़ रहा भारी
स्थानीय चूड़ी कारोबार से जुड़े पुराने व्यापारी व उद्यमियों के अनुसार बिक्री बढ़ाने के चक्कर में स्थानीय कारोबारियों ने जयपुर और इंदौर निवासी श्रमिकों को यहां पर बुला लिया। उन्हें मेटल और लाख के कड़ा तैयार कराने के साथ चूड़ी कारोबार की बारीकियां भी समझा दीं। यही कारण रहा कि बाहर से आए श्रमिक अब कुशल कारीगर के रूप में निखर कर अपने प्रांत चले गए। वहां पर काम शुरू कर दिया।
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इन श्रमिक बस्तियों में सूने पड़े फैंसी चूड़ी के अड्डे
शहर में प्रमुख रूप से ऐलान नगर, सवितानगर, सैलई, चंद्रवार गेट, शीतल खां रोड, सत्यनगर, टापा, कबीर नगर, सरजीवन नगर, झलकारी नगर और करबला में सादा चूड़ी जुड़ाई के साथ ही फैंसी चूड़ी व कड़ा आदि तैयार होते हैं। इन मोहल्ला में करीब 20-25 हजार कामगार फैंसी चूड़ी व कड़ा तैयार करते थे। अब इनकी संख्या घट कर महज पांच से सात हजार ही है।
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चार साल में फैंसी कड़ा का कारोबार घटा
फैंसी कड़ा बनाने वाले श्याम सुंदर, पूरन सिंह आदि के अनुसार पहले प्रतिमाह दो से तीन करोड़ तक की लागत वाले फैंसी कड़ा तैयार व बिक्री होते थे। अब यह दस-पांच लाख की लागत वाला माल भी बिक्री करने में दिक्कतें है।
शहर में निर्मित कांच के फैंसी कड़े आज भी बेजोड़ हैं। बिहार, जयपुर और इंदौर में निर्मित फैंसी कड़े हमारे लिए चुनौती हैं। फिर भी हम बदलते वक्त के अनुसार सुधार करेंगे।
नरेश कुमार, फैंसी कड़ा कारोबारी
कांच निर्मित फैंसी चूड़ी व कड़ा का काम दूसरी जगह शिफ्ट होने से समस्या बढ़ी है। खास तौर पर बाहर से आने वाले श्रमिक वर्ग यहां से काम सीख कर अपने गृह जनपद में काम करने लगे हैं। यही कारण है कि लगभग 100 करोड़ वार्षिक फैंसी चूड़ी कांच के कड़ा कारोबार दिनों दिन अन्य शहरों में भी पांव जमाने लगा है।
-प्रशांत गुप्ता, कड़ा व कंगन कारोबारी