जिला उद्योग केंद्र में गुरुवार को अफसरों की गौरमौजदगी में कर्मचारियों ने पुरानी फाइलें जला डालीं। वर्तमान में उद्योग विभाग से संबंधित कई शिकायतों की जांच रही है,ऐसे में पुरानी फाइलों को जलाना किसी षडयंत्र की ओर इशारा कर रहा है।
उद्योग विभाग लंबे समय से चर्चा में बना हुआ है। इसका प्रमुख कारण है कि विभाग में पूर्व में तैनात रहे अफसरों द्वारा गलत ढंग से उद्योगों के संचालन व क्षमतावृद्धि की अनुमति दे दी। कांच उद्योग से होने वाले प्रदूषण एवं क्षमतावृद्धि को लेकर बड़े औद्योगिक संगठनों द्वारा पर्यावरण मंत्रालय, टीटीजेड अथॉरिटी, एनजीटी में लगातार शिकायतें की जा रही है। एनजीटी में 143 इकाइयों के मामले में दो साल से लगातार सुनवाई हो रही है। इधर 43 इकाइयों की पैरवी के मामले में भी विभाग फंस गया है। 43 इकाइयों का मामला टीटीजेड से निकल कर पर्यावरण मंत्रालय तक पहुंचा। तब मंत्रालय से वर्ष 1996 में संचालित इकाइयों द्वारा कोल कैपेसिटी, प्रोडेक्शन क्षमता के साथ वर्तमान में संचालित इकाइयों में गैस की आपूर्ति एवं प्रोडेक्शन क्षमता के साथ लंबित 43 इकाइयों का प्रजेंट स्टेट्स तलब कर लिया है। मंत्रालय को रिपोर्ट भेजने के लिए 14 दिसंबर से लगातार अधिकारी-कर्मचारी जुटे हैं, परंतु अभीतक फाइनल रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी है।
जिला उद्योग केंद्र में गुरुवार को उपायुक्त उद्योग, सहायक प्रबंधक सहित कोई जिम्मेदार अफसर मौजूद नहीं था। इसी का फायदा उठाते हुए विभाग के कर्मचारियों ने दोपहर करीब दो बजे कई पुराने कागज व फाइलें आग के हवाले कर दीं।
उद्योग विभाग की खबर में वर्जन
उद्योग केंद्र में फाइलें जलाने का मामला दो घंटे पहले ही मेरे संज्ञान में आया है। इस मामले में फोन से जानकारी ली गई है। फाइल जलाने में जिस कर्मचारी का नाम सामने आया है, उसे कल नोटिस जारी करते हुए पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
वीरेंद्र कुमार
उपायुक्त उद्योग