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चित्रकूट पहुंचे भरत, राम से मिलाप

सार

श्री सनातन धर्म रामलीला महोत्सव समिति द्वारा रविवार को भरत मिलाप की लीला का मंचन किया गया।राजा दशरथ के देहांत के बाद गुरु वशिष्ठ भरत और शत्रुघ्न को ननिहाल से बुलवाते हैं।इस पर भरत इनकार कर देते हैं और तीनों माताओं व अयोध्या की सेना साथ लेकर भगवान राम को मनाने वन को निकलते हैं।
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फिरोजाबाद ! श्री सनातन धर्म रामलीला महोत्सव में भरत मिलाप के दौरान लीला का मंचन करते पात्र - फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। श्री सनातन धर्म रामलीला महोत्सव समिति द्वारा रविवार को भरत मिलाप की लीला का मंचन किया गया। राजा दशरथ के देहांत के बाद गुरु वशिष्ठ भरत और शत्रुघ्न को ननिहाल से बुलवाते हैं। जब भरत अयोध्या पहुंचे तो पूरी अयोध्या नगरी शोक में डूबी हुई थी। इस दौरान उन्हें कुछ शंका हुई। जब वे महल में पहुंचे तो उन्हें पूरी घटना पता चली।
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जब वे माता कैकेयी के पास पहुंचे तो उन्होंने भरत को अयोध्या का राज संभालने को कहा। तब भरत क्रोध में बोले कि मुझे इस अयोध्या का राजा तो क्या अगर तीनों लोगों का राजा भी बनाओगे तो भी मैं भी ठुकरा दूंगा। तब गुरु वशिष्ठ ने उनको समझाया और पिताजी का अंतिम संस्कार के लिए कहा। राजा दशरथ के अंतिम संस्कार के बाद गुरु वशिष्ठ भरत को राजपाठ संभालने को कहते हैं। इस पर भरत इनकार कर देते हैं और तीनों माताओं व अयोध्या की सेना साथ लेकर भगवान राम को मनाने वन को निकलते हैं।
भरत को सेना सहित आता देख लक्ष्मण को शंका होती है। तब श्रीराम ने उन्हें समझाते हैं कि भरत जैसा भाई इस दुनिया में हो ही नहीं सकता। इसी दौरान भरत पहुंच जाते हैं। श्री राम उन्हें गले लगा लेते हैं। चित्रकूट में भगवान राम और भरत का मिलाप हुआ। भरत श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या चले जाते है। लीला के दौरान श्याम सिंह यादव, नितेश अग्रवाल जैन, शैलेंद्र गुप्ता शालू के अलावा कमेटी के प्रवीन चंद्र मिश्रा गुड्डू, शुभम मिश्रा, शृंगार कमेटी के नीरज चतुर्वेदी, बॉबी शर्मा, कलाकार कमेटी के रिंकू यादव मौजूद रहे।
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